बिहार कहानियां और लोक कथाएं Bihar Kahaniyan Aur Lok Kathayen
बिहार की लोक कथाएँ
- स्वप्न-वृक्ष (बिहार)
- शीत बसंत (बिहार)
- कचनार (बिहार)
- खंजड़ी की खनक (मगध/बिहार)
- खूंटे में मोर दाल है (बिहार)
- फुलवा और दुखिया (बिहार)
- बिहुला-विषहरी (बिहार)
- मंत्रीकुमार (बिहार)
- हिरनी-बिरनी लोकनाट्य - शंभू शरण सत्यार्थी
- लोकगाथा - बोहुरा गोढ़नी उर्फ नेटुआ दयाल सिंह
- लोकगाथा - दीना-भद्री का कथानक
- लोकगाथा राजा सलहेस - मिथिलांचल क्षेत्र
- लोकगाथा - रेशमा – चूहड़मल (कथानक
- भलाई का फल मीठा (बिहार)
- दुष्ट कौआ (बिहार)
- नींद न जाने टूटी खाट (बिहार)
- पुतलों का कमाल (बिहार)
- सुरमतिया गाय (बिहार)
- स्वप्न-घोर पिंजरा (बिहार)
- दोस्ती के रंग (बिहार)
- ईश्वर की महिमा (बिहार)
- जंगल के जानवरों से दोस्ती (बिहार)
- ख़रगोश और हाथी (बिहार)
- ललमुनिया की समझदारी (बिहार)
- मांस का मूल्य (बिहार)
- मच्छर और पवन (बिहार)
- मंगरू काका (बिहार)
- राजा विक्रमादित्य का त्याग (बिहार)
- सोमारू-मंगरू (बिहार)
- सूअर की तरह जीना (बिहार)
- योग्य वर की तलाश (बिहार)
- अपनी क़िस्मत की कमाई (बिहार)
- बितनवाँ (बिहार)
- चालाक सियार (बिहार)
- क़ुदरत का करिश्मा (बिहार)
- मूर्ख लड़का और लाल परी (बिहार)
- प्रभु की लीला (बिहार)
- राजकुमार की ज़िद्द (बिहार)
- रूपवती और प्रजावत्सल बिंबिसार (बिहार)
- समूह की चोरी, समूह को दंड (बिहार)
- विधवा का बेटा और रोम की राजकुमारी (बिहार)
- भाई भुहुर-भुहुर (बिहार)
- बिना विचारे जो करे (बिहार)
- क्या खाऊँ, क्या पिऊँ (बिहार)
- मूर्ख कौन ? (बिहार)
- मुर्ग़ा और मानुस (बिहार)