Karamjit Singh Gathwala कर्मजीत सिंह गठवाला
कर्मजीत सिंह गठवाला (23 मार्च 1951- ) का जन्म गाँव नारायण गढ़, ज़िला संगरूर (पंजाब) में हुआ ।
इन्होंने पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी में एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने जीवन के हर क्षेत्र को करीब से
देखा है। इनके पिता सरदार सुरजीत सिंह पेप्सु (PEPSU) में बिस्वेदारी के विरुद्ध चल रहे मुजारा आंदोलन
के समय सरदार तेजा सिंह सुतंतर के नेतृत्व में गठित लाल पार्टी (Red Party) के सरगर्म कारकुन थे ।
वह अमृतधारी सिख थे । घर में धार्मिक तथा क्रन्तिकारी साहित्य से सम्बंधित बहुत सी किताबें व ग्रन्थ पढ़ने
के लिए थे, इसलिए बचपन से ही इन्हें साहित्य से गहरा लगाव रहा है।
यह लगभग पंद्रह वर्ष गाँव के सरपंच भी रहे और बाईस वर्ष तक संगरूर में शिक्षा संस्थान भी चलाया ।
जनवरी 2011 से दो वेबसाइटस (Websites) - punjabi-kavita.com और hindi-kavita.com के संचालक
के तौर पर अपने पुत्र अंतरप्रीत सिंह गठवाला (B.Tech. LLm) के सहयोग से साहित्य की सेवा-सुश्रुषा में सेवारत हैं ।
सम्मान - 'पंजाबी माँ बोली सेवा सम्मान' - 21 फ़रवरी 2021 को, पंजाब कला परिषद द्वारा, पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए।
Pariyan Bani Titliyan (Hindi Stories Collection) - Karamjit Singh Gathwala
परियाँ बनी तितलियाँ (कहानी संग्रह) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- फिर धरती पर सरगम गूँजे (बाल कहानी) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- बुलबुल और अमरूद (बाल कहानी) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- शबनम परी (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- अनोखी कुश्ती (बाल कहानी) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- सफ़ेद परी और काली परी (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- परियाँ बनी तितलियाँ (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- चाँद की परी और सरगम की उड़ान (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- रंगों का परीलोक (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- फाख्ता के अंडे और मैं – बचपन की एक सच्ची घटना
- परियाँ और दीवाली (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला
- सरगम और प्रेरणा की परी (परी कथा) - कर्मजीत सिंह गठवाला