सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(Sarveshwar Dayal Saxena)

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना (15 सितम्बर 1927 - 23 सितम्बर 1983) ‘नई कविता’ के चर्चित कवि एवं प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ था। वे तीसरे सप्तक के महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। 'दिनमान' पत्रिका में प्रकाशित उनका स्तंभ 'चरचे और चरखे' काफ़ी लोकप्रिय रहा। 1983 में उनके काव्य-संग्रह 'खूँटियों पर टँगे लोग' के लिए उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रमुख कृतियाँ:

  • काव्य रचनाएँ: तीसरा सप्तक, काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ, कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टंगे लोग।
  • उपन्यास: पागल कुत्तों का मशीहा, सोया हुआ जल, उड़े हुए रंग, सच्ची सड़क, अँधेरे पर अँधेरा।
  • नाटक: बकरी, लड़ाई, अब गरीबी हटाओ, कल भात आएगा तथा हवालात।
  • बाल साहित्य: बतूता का जूता, महंगू की टाई, भों-भों खों-खों, लाख की नाक।
  • यात्रा संस्मरण: कुछ रंग कुछ गंध।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की तस्वीर

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