Balkrishna Bhatt
बालकृष्ण भट्ट
बालकृष्ण भट्ट (३ जून १८४४ – २० जुलाई १९१४) हिन्दी के सफल पत्रकार, उपन्यासकार, नाटककार और निबंधकार थे। उन्हें आज की गद्य प्रधान कविता का जनक माना जा सकता है। हिन्दी गद्य साहित्य के निर्माताओं में उनका प्रमुख स्थान है।
प्रमुख रचनाएँ:
निबन्ध संग्रह: साहित्य सुमन, भट्ट निबंधमाला, आत्मनिर्भरता (1893)
उपन्यास: नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान और एक सुजान, रहस्यकथा
मौलिक नाटक: दमयन्ती स्वयंवर, बाल-विवाह, चन्द्रसेन
अनुवाद: वेणीसंहार-नाटक, मृच्छकटिक-नाटक, पद्मावती-नाटक
साहित्य सेवा और स्थान: भारतेंदु काल के निबंध-लेखकों में भट्ट जी का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने पत्र, नाटक, काव्य, निबंध, उपन्यास और अनुवादक के विभिन्न रूपों में हिंदी की सेवा की और उसे धनी बनाया। साहित्य की दृष्टि से भट्ट जी के निबन्ध अत्यन्त उच्चकोटि के हैं। इस दिशा में उनकी तुलना अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध निबंधकार चार्ल्स लैंब से की जा सकती है। गद्य काव्य की रचना भी सर्वप्रथम भट्ट जी ने ही प्रारम्भ की। बालकृष्ण भट्ट की प्रतिनिधि रचनाओं का संकलन साहित्य अकादमी ने 'बालकृष्ण भट्ट - रचना संचयन' नाम से प्रकाशित किया है।