Ved Rahi / वेद राही
वेद राही (22 मई 1933–) हिन्दी और डोगरी के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा फिल्म निर्देशक हैं। उनका जन्म जम्मू-कश्मीर में लाला मुल्कराज सराफ के घर हुआ था, जो जम्मू से “रणबीर” नाम का समाचार-पत्र निकालते थे। राही जी को बचपन से ही लिखने का शौक था।
उन्होंने पहले उर्दू में लिखना आरम्भ किया और फिर हिंदी तथा डोगरी भाषा में भी लिखने लगे। अब तक उनके 7 उपन्यास, तीन कहानी-संग्रह तथा दो कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 1983 में इन्हें डोगरी उपन्यास 'आले' पर 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। उनकी कुछ मशहूर कहानियाँ 'काले हत्थ' (1958), 'आले' (1982), 'क्रॉस फायरिंग' हैं; तथा प्रमुख उपन्यासों में 'हाड़ बेड़ी ते पत्तन' (1960), 'परेड' (1982), 'टूटी हुई डोर' (1980), 'गर्म जून' आदि शामिल हैं।
उन्होंने लगभग 25 हिंदी फिल्मों के लिए कहानियाँ, संवाद और पटकथा (स्क्रीनप्ले) लिखी। उन्होंने 'वीर सावरकर', 'बेज़ुबान', 'चरस', 'संन्यासी', 'बे-ईमान', 'पवित्र पापी', 'यह रात फिर न आएगी' आदि कई फिल्मों में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने 9 फिल्मों और धारावाहिकों का निर्देशन भी किया है।