Ratan Nath Sarshar रतननाथ सरशार
रतन नाथ धर सरशार (जन्म - १८४६ - मृत्यु १९०३) उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार थे। इनके लेखन के प्रसंशकों में हिंदी और उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद भी शामिल थे। उनके द्वारा रचित उपन्यास फसाना-ए-आज़ाद का प्रकाशन १८७८ से १८८५ के मध्य धारावाहिक रूप से उनके अखबार अवध अखबार में हुआ। इस नॉवेल का हिन्दी अनुवाद प्रेमचंद ने आजाद-कथा नाम से प्रकाशित किया और इसको आधार बनाकर शरद जोशी ने ८० के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक वाह जनाब की भी रचना की। उनकी अन्य पुस्तकें हैं - सैर कोहसार (पर्वत की सैर), जामे-सरशार, खुदाई फौजदार, पी कहाँ?, हुश्शू ।
रतननाथ सरशार - उपन्यास, कहानियाँ हिन्दी में
Ratan Nath Sarshar - Novels and Stories in Hindi
उपन्यास - रतननाथ सरशार
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 1-10)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 11-20)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 21-30)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 31-40)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 41-50)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 1 - खंड 51-59)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 2 - खंड 60-70)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 2 - खंड 71-80)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 2 - खंड 81-90)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 2 - खंड 91-100)
- आजाद-कथा - रतननाथ सरशार (भाग 2 - खंड 101-111, अंत)