Mamta Kalia (ममता कालिया)
ममता कालिया (जन्म: 02 नवम्बर, 1940) प्रमुख भारतीय लेखिका हैं। वे कहानी, नाटक, उपन्यास, निबंध, कविता और पत्रकारिता यानी साहित्य की लगभग सभी विधाओं में निरंतर सक्रिय रही हैं। लगभग आधी सदी के काल खंड में उन्होंने 200 से अधिक कहानियों की रचना की है। वर्तमान में वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका "हिन्दी" की संपादिका हैं। उनका जन्म वृन्दावन में हुआ तथा शिक्षा दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर और इन्दौर में हुई। उनके पिता स्व. विद्याभूषण अग्रवाल हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के विद्वान थे।
प्रमुख कृतियाँ:
कहानी संग्रह: छुटकारा, एक अदद औरत, सीट नं. छ-, उसका यौवन, जाँच अभी जारी है, प्रतिदिन, मुखौटा, निर्मोही, थिएटर रोड के कौए, पच्चीस साल की लड़की। (दो खंडों में संपूर्ण कहानियाँ ममता कालिया की कहानियाँ नाम से प्रकाशित हैं।)
उपन्यास: बेघर (1971), नरक दर नरक (1975), प्रेम कहानी (1980), लड़कियाँ (1987), एक पत्नी के नोट्स (1997), दौड़ (2000), अँधेरे का ताला (2009), दुक्खम्-सुक्खम् (2009), कल्चर वल्चर (2016), सपनों की होम डिलीवरी (2017)।
कविता संग्रह: खाँटी घरेलू औरत, कितने प्रश्न करूँ, नरक दर नरक, प्रेम कहानी।
नाटक संग्रह: यहाँ रहना मना है, आप न बदलेंगे।
संस्मरण: कितने शहरों में कितनी बार।
अनुवाद: मानवता के बंधन (सॉमरसेट मॉम का उपन्यास)।
संपादन: बीसवीं सदी का हिंदी महिला-लेखन (खंड 3)।
सम्मान और पुरस्कार:
वर्ष 2017 में प्रतिष्ठित ‘व्यास सम्मान’ (उपन्यास दुक्खम-सुक्खम के लिए), अभिनव भारती सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान (2004), यशपाल स्मृति सम्मान, महादेवी स्मृति पुरस्कार, कमलेश्वर स्मृति सम्मान, सावित्री बाई फुले स्मृति सम्मान, अमृत सम्मान, लमही सम्मान (2009), जनवाणी सम्मान (2008), और सीता पुरस्कार (2012)।