Kishorilal Goswami (किशोरी लाल गोस्वामी)
किशोरी लाल गोस्वामी जी (1865 ई.-1932 ई.) का जन्म वृंदावन के एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। इनका परिवार निम्बार्क सम्प्रदाय का अनुयायी था। किशोरी लाल गोस्वामी के पितामह वृंदावन के सर्वश्रेष्ठ विद्वान् एवं आचार्य थे। इनके नाना वाराणसी के संस्कृतज्ञ थे, जिनसे भारतेन्दु जी ने छन्दशास्त्र सीखा था।
किशोरी लाल जी का लालन-पालन और शिक्षण इनके नाना के घर वाराणसी में हुआ, जिसके कारण वे भारतेन्दु जी के सम्पर्क में आए। 1898 ई. में उन्होंने 'उपन्यास' पत्रिका निकाली जिसमें उनके उपन्यास प्रकाशित हुआ करते थे। वे 'सरस्वती' के पंचायती सम्पादक मण्डल के सदस्य भी थे। उन्होंने लगभग 65 उपन्यासों के अतिरिक्त कई कविताएँ और विविध विषयों पर अपनी सिद्धहस्त लेखनी चलाई। 'इन्दुमती' और 'गुलबहार' कहानियों के लेखक गोस्वामी जी को हिन्दी का प्रथम कहानीकार होने का श्रेय प्राप्त है।
मुख्य कृतियाँ:
उपन्यास: त्रिवेणी वा सौभाग्य श्रेणी, प्रणयिनी-परिणय, हृदयहारिणी वा आदर्श रमणी, लवंगलता वा आदर्श बाला, सुल्ताना रज़िया बेगम वा रंगमहल में हलाहल, गुलबहार, हीराबाई वा बेहयाई का बोरका, लावण्यमयी, सुख शर्वरी, प्रेममयी, इन्दुमती वा वनविहंगिनी, तारा वा क्षात्र-कुल-कमलिनी, तरुण तपस्विनी वा कुटीर वासिनी, चंद्रावली वा कुलटा कुतूहल, जिंदे की लाश (जासूसी उपन्यास), माधवी-माधव वा मदन-मोहिनी, लीलावती वा आदर्श सती, राजकुमारी, चपला वा नव्य समाज चित्र, कनक कुसुम वा मस्तानी, मल्लिका देवी वा बंग सरोजिनी, पुनर्जन्म वा सौतिया डाह, सोना और सुगंध वा पन्नाबाई, लखनऊ की कब्र वा शाही महलसरा, अँगूठी का नगीना, लाल कुँवर वा शाही रंगमहल।
कविता: किशोरी सतसई | नाटक: चौपट-चपेट, मयंक मंजरी।