भैरव प्रसाद गुप्त
Bhairav Prasad Gupta
भैरव प्रसाद गुप्त (7 जुलाई 1918 – 7 अप्रैल 1995) हिन्दी साहित्य के प्रगतिशील विचारधारा के कथाकार, उपन्यासकार तथा प्रख्यात सम्पादक थे। विशेषतः 'कहानी' एवं 'नयी कहानियाँ' पत्रिकाओं के संपादन द्वारा उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में एक मानदण्ड कायम किया तथा लंबे समय तक नयी कहानी आन्दोलन के संचालन में प्रशंसनीय योगदान दिया।
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिवानकलाँ नामक गाँव में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे इर्विन कॉलेज इलाहाबाद गये, जहाँ वे शिवदान सिंह चौहान, जगदीश चन्द्र माथुर, गंगा प्रसाद पांडे जैसे साहित्यकारों के संपर्क में आये। स्नातकोत्तर शिक्षा के पश्चात् उन्होंने दक्षिण भारत में हिन्दी प्रचारक के रूप में अध्यापन एवं आकाशवाणी में सेवाएँ दीं।
आगे चलकर 1944-1954 तक उन्होंने 'माया' और 'मनोहर कहानियाँ' का संपादन किया। इसके बाद वे 'कहानी' (1954-1960) और 'नयी कहानियाँ' (1960-1963) के संपादन में समर्पित रहे। 1974 से 1980 तक वे मित्र प्रकाशन, इलाहाबाद के परामर्शदाता भी रहे।
प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें:
उपन्यास: शोले, मशाल, गंगा मैया, जंजीरें और नया आदमी, सत्ती मैया का चौरा, धरती, आशा, कालिन्दी, रम्भा, अंतिम अध्याय, नौजवान, एक जीनियस की प्रेमकथा, भाग्य देवता, अक्षरों के आगे (मास्टर जी), छोटी-सी शुरुआत।
कहानी संग्रह: मुहब्बत की राहें, फरिश्ता, बिगड़े हुए दिमाग, इंसान, सितार के तार, बलिदान की कहानियाँ, मंजिल, महफिल, सपने का अंत, आँखों का सवाल, मंगली की टिकुली, आप क्या कर रहे हैं?
नाटक व एकांकी: कसौटी, चंदबरदाई, राजा का बाण।