मां (राजस्थानी कहानी) : विजयदान देथा 'बिज्‍जी'

Maan (Rajasthani Story) : Vijaydan Detha 'Bijji'

आठ दिनां रै उपरांत मा री बरसती आंख्यां नै आज नीठ झपकी आयी। झपकी कांईं ही-बेचेतौ, थाकेलौ अर लाचारी। मूरछागत नींद में ई मां रा विलखा-विलखा दुमना होठ घड़ी-घड़ी मुळक सूं सैंचन्नण व्है जाता। जागती जूंण गम्योड़ा गीगला नै मां नींद रै सपनै पाछौ खोळै रमावती ही।

अणथक फांफ अर बौछाड़ रै थड्डै बारी रा भिड़्योड़ा फड़का फटाक करता रा खुलग्या। बीजळी किड़की। मां रै कमरै अेकर सळावौ नाचनै अलोप व्हैगौ। मां रै होठां वळै मुळक नाची, अबोट अर पवीत। जकौ फगत मां रै होठां ई छाजै।

बीजळी वळै अेक लांबौ सळावौ भर्यौ। मां रै कमरै वळै मधरौ-मधरौ उजास नाच्यौ। बायरा री फांफ रै फटकारै मां रै मुळकतै उणियारै बौछाड़ रौ छाबकौ लाग्यौ। बैरण नींद कित्ती दोरी आई अर छिण में विलायगी। हळफळाय भचकै बैठी व्ही। सपना में हाथै लाग्योड़ौ गीगलौ वळै गमग्यौ। जीवता गीगला री मौत सूं ई औ धांमलौ मोटौ हौ। अबै माथौ उछाळणा में कीं खांमी नीं। कदास कमरा रै अंधारै चापळ्योड़ौ व्है! हाबगाब धूजतै हाथ खटकौ दबायौ।

डरपती आंख्यां कमरा में च्यारूंमेर भाळ्यौ। मुन्नौ व्है तौ दीसै! सिळगतौ उजास खाऊं-खाऊं उणरै डील बटका भरण लागौ। बिछावणै मीट अटकी, लीली मेम ऊंधी पड़ी ही। मुन्नौ अेक छिण सारू ई जिणनै आगी नीं करतौ। सूवती वेळा ई खाख में चिप्योड़ी राखतौ।

आज वौ ई मुन्नौ मां अर मेम दोनां सूं आंतरै ई आंतरै ढळग्यौ।

किड़किड़ाट करती बीजळी जोर सूं किड़की। वळै वायरा रै झपाटै फांफ आई। बिछावणै ऊंधी सूती मेम तरबतर व्हैगी। अर अठी मां री कुड़ती-कांचळी, हांचळां रिसतै दूध सूं तर-तर आली होवण लागी। उणरै माथा में जांणै ठौड़-ठौड़ अलेखूं कीडिय़ां री कुळबुळाट माची। आंगळियां कस्योड़ा बाळ वा जोर सूं तांण्या। वळै बीजळी किड़की। वळै सैचन्नण सळावौ भळक्यौ। पळ-पेंपरळां, पळ-पेंपरळां पांणी बरसण ढूकौ।

आखी कुदरत ई जांणै मां रा हेज माथै किड़किड़ाय धावौ बोल्यौ व्है। तड़ातड़ छांट-छांट रै समचै मुन्नौ डुसक्यां भर-भर अरड़ावतौ व्है- 'मां, म्है भीजूं। म्हैं भीजूं।'

मां ताचकनै दोनूं हाथां मेम झांपी अर झरतै हांचळां चेपली। सूनै अडोळै बिछावणै वळै अेक बाछौड़ ताचकी।

मां बावळी उनमांन जागती वेली, 'हित्यारा कंस, बरजतां-बरजतां म्हारा मुन्ना नै माडै खाडाबूच कर न्हाक्यौ अर म्हारौ कीं बस नीं पूगौ।'

लारलै सोमवार मां रै देखतां-देखतां मुन्नौ आंख्यां मीचली तौ ई उणरौ बस कठै पूगौ! बच्योड़ा चेता नै कोयां उतार वा टगमग-टगमग मुन्ना रै नैणां भाळती रीवी अर मुन्ना री आंख्यां अेकण ठौड़ पाथरगी। मां रौ हेज छाती फाड़-फाड़ कुरळायौ। दुनिया रै तमाम जीवधारियां रै अेकठ करार वा मुन्ना नै झिंझेड़-झिंझेड़ घणी ई कूकी, पण मुन्नौ नीं तौ अेकर ई पाछौ मुळक्यौ, नीं अेक पलक ई जोयौ अर नीं पाछौ अेक सांस ई लियौ। मां अरड़ा-अरड़ा बरकी अर मुन्नौ देखतां-देखतां अबोलौ व्हैगो।

तौ ई उणनै पतियारौ नीं व्हियौ के मुन्नौ समायगौ। पतियारौ करै जैड़ी बात ई नीं ही। मां रै खोळै मां रौ जायौ कीकर समावै! कांईं उणरै हेज रौ इत्तौ ई गाढ़ कोनी!

वा झांपळियां मारती रीवी अर लोग-बाग मुन्ना नै झेल वहीर होवण लागा तद वा कित्ता लालरिया लिया, कित्ता कळझळ कर्या के उणरै बेटा नै मत आंतरै ले जावौ। वा उणनै पाछौ जीवतौ कर देवैला। वा मां है। उणरै हांचळां रौ तूमार तौ जोवौ। मां रै सांम्ही मौत रौ कीं पसवाड़ौ नीं फिरै।

पण मौत रै सांम्ही मां रौ पसवाड़ौ नी फिर्यौ। किण री जिनात के अंतस रौ धांमलौ अर आंख्यां रा आंसूं खोसनै आंतरै करै! बेटा रै समायां उपरांत ई वा उणरै सुख-दुख रौ वैड़ौ ई चेतौ राखती।

कड़-कड़ करती बीजळी वळै किड़की। जाणै मां रै अंतस री बळत बादळां घुळगी व्है। बिरखा री छांट-छांट सूं जांणै उणरौ झुरावौ गळ-गळनै झरै।

आखी दुनिया बोळी व्है तौ व्है, पण मां आपरै जाया री कुरळाट भलां कीकर सुणी-अणसुणी करै। बादळां री गाज, बीजळी री किड़किड़ाट, फांफ री फटकार, बायरा री सांय-सांय अर पांणी री तड़तड़ाट बिचाळै फगत मुन्ना रा डुस्किया सुणीजता- 'मां, म्हैं भीजूं। बचाव। बचाव।' अरे! आ तौ साख्यात उणरै मुन्ना री बोली है।

मां रै हेज रौ जठै पसवाड़ौ नीं फुरै, उण सूं लांठी लाचारी दूजी कांईं व्है! रबड़ री मेम नै पाछी बिछावणै सूवाण वा झटौझट आडौ उघाड़्यौ। परनाळां पांणी ओसरतौ हौ।

बरसती आंख्यां वा बरसता मेह नै जोयौ। आ बैरण बिरखा तौ जुगानजुग नीं ढबणी। अणछक वा होठां ई होठां मुळमुळाई, 'म्हारा लाडल, थनै भीजण सूं ढाबणौ म्हारै बस री बात कोनी। पण सूखी म्हैं ई नीं रैंवूला।'

अर दूजै ई छिण खुलै बाळां बारै आय वा खुली छात माथै ऊभगी। जांणै कोई पूतळी पगां हाली व्है। सळावा भरती बीजळी आवेस जोर सूं किड़की। पळ-पेंपरळां पांणी री सासती झड़ चालू ही। होडाहोड बादळा धावड़ता हा। वादौवाद बीजळियां कुरळावै ही। बिरखा री झड़ में छिण-छिण भीजती मां वळै मुळमुळाई- 'थूं भीजै तौ म्हैं ई भीजूं। दूजौ म्हारौ जोर ई कांईं!’

  • मुख्य पृष्ठ : विजयदान देथा 'बिज्‍जी' : हिन्दी कहानियाँ, उपन्यास और अन्य गद्य कृतियाँ
  • मुख्य पृष्ठ : संपूर्ण हिंदी कहानियां, नाटक, उपन्यास और अन्य गद्य कृतियां