Prem Parkash / प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश (26 मार्च 1932 - ) ने एम.ए. (उर्दू) तक शिक्षा प्राप्त की। 'खन्नवी' उपनाम से लेखन 1955 से 1958 तक किया। 'रोज़ाना मिलाप' और 'रोज़ाना हिंद समाचार' अखबारों में पत्रकारिता की। 1990 से 2010 तक साहित्यिक पंजाबी त्रैमासिक पत्रिका 'लकीर' निकालते रहे। 'कच्चघड़े' (1966), 'नमाज़ी' (1971), 'मुक्ति' (1980), 'श्वेताम्बर ने कहा था' (1983), 'प्रेम कहानियाँ' (1986), 'कुझ अणकिहा वी' (1990), 'रंगमंच दे भिख्सू' (1995), 'कथा-अनंत' (समग्र कहानियाँ) (1995), 'सुणदैं ख़लीफ़ा' (2001), 'पदमा दा पैर' (2009) - इनके कहानी संग्रह हैं। एक कहानी संग्रह 'डेड लाइन' हिंदी में तथा एक कहानी संग्रह अंग्रेजी में 'द शॉल्डर बैग एंड अदर स्टोरीज़' (2005) भी प्रकाशित हुआ है। इसके अतिरिक्त एक उपन्यास 'दस्तावेज़' 1990 में प्रकाशित हुआ। आत्मकथा 'बंदे अंदर बंदे' (1993) तथा 'आत्ममाया' (2005) में प्रकाशित हुईं। कई पुस्तकों का संपादन जिनमें 'चौथी कूट' (1996), 'नाग लोक' (1998), 'दास्तान' (1999), 'मुहब्बतां' (2002), 'गंढां' (2003) तथा 'जुगलबंदियां' (2005) प्रमुख हैं। पंजाबी में मौलिक लेखक के साथ-साथ ढेरों पुस्तकों का अन्य भाषाओं से पंजाबी में अनुवाद भी किया जिनमें उर्दू के कहानीकार सुरेन्द्र प्रकाश का कहानी संग्रह 'बाज़गोई' का अनुवाद 'मुड़ उही कहाणी', बंगला कहानीकार महाश्वेता देवी की चुनिंदा कहानियाँ, हिंदी से 'बंदी जीवन' - क्रांतिकारी सचिन्द्र नाथ सान्याल की आत्मकथा, प्रेमचंद का उपन्यास 'गोदान', 'निर्मला', सुरेन्द्र वर्मा का उपन्यास 'मुझे चाँद चाहिए' तथा काशीनाथ सिंह की चुनिंदा कहानियाँ आदि प्रमुख अनुवाद कृतियाँ हैं।

कहानी संग्रह 'कुझ अणकिहा वी' पर 1992 में साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किए गए। इसके अतिरिक्त पंजाब साहित्य अकादमी (1982), गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर द्वारा भाई वीर सिंह वारतक पुरस्कार (1986), साहित्य अकादमी, दिल्ली (1992), पंजाबी अकादमी, दिल्ली (1994), पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना (1996), कथा सम्मान, कथा संस्थान, दिल्ली (1996-97), शिरोमणि साहित्यकार, भाषा विभाग, पंजाब (2002) तथा साहित्य रत्न, भाषा विभाग, पंजाब (2011) आदि सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं।

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