K. V. Tirumalesh / के. वी. तिरुमलेश
के. वी. तिरुमलेश (12 सितंबर 1940 — 30 जनवरी 2023) भारतीय कवि, लेखक और कन्नड़ एवं अंग्रेजी भाषाओं के आलोचक और एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। कन्नड़ (2010) में उनके कविता संग्रह ‘अक्षय काव्य’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तिरुमलेश का जन्म 1940 में ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी (वर्तमान कासरगोड जिला, भारतीय राज्य केरल) के कराडका गाँव में हुआ था। उनके पास अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री और भाषा विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री है। उन्होंने अंग्रेजी और विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद में पढ़ाया। उन्हें 2016 के लिए भी साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया।
इनकी रचनाएँ हैं:
कविता संग्रह: मुखावदगलु / ಮುಖವಾಡಗಳು (मास्क, 1968), Vathara / ವಠಾರ (अपार्टमेंट, 1969), महाप्रस्थान / संस्थान (द ग्रेट मार्च, 1971), मुखमुखी / ಮುಖಾಮುಖಿ (आमने-सामने, 1978), ‘अवधा / ಅವಧ’ (1988), ‘पापियो... / ಪಾಪಿಯೂ’ (1993), अक्षय काव्या / ಅಕ್ಷಯ (2010), ‘आयदा कवितागलु / ಆಯ್ದ’ (2011), ‘अरबी / ಅರಬ್ಬी’ (2015)।
उपन्यास / लघु कथाएँ: ‘तरंगंतरंगा / ತರಂಗಾಂತರಂಗ’, ‘डॉन क्विक्सोट / अन्य’।
निबंध / आलोचना: ‘सम्मुख / ಸಮ್ಮುಖ’, ‘व्याक्ति मट्टू परम्परागलु / ವ್ಯಕ್ತಿ’, ‘उलेखा / ಉಲ್ಲೇಖ’, ‘अला-निराला / ಆಳ-ನಿರಾಳ’ (1-4), ‘काव्या करण / ಕಾವ್ಯ’, ‘नम्मा कन्नड़ / ನಮ್ಮ ಕನ್ನಡ’, ‘वगर्थ / ವಾಗರ್ಥ’, ‘वचनशाले / ವಚನಶಾಲೆ’।
गैर-काल्पनिक: व्याकरण और संचार: भाषा के रूप और कार्य पर निबंध (1999), भाषा का परिदृश्य: कन्नड़ भाषाविज्ञान में मुद्दे (2000)।