Chaganti Somayajulu / चागंटि सोमयाजुलु
चागंटि सोमयाजुलु (१७ जनवरी १९१५ - २ जनवरी १९९४), जिन्हें 'चासो' के नाम से जाना जाता है, २०वीं सदी के तेलुगु साहित्य के प्रसिद्ध लघु-कथा लेखक थे। उनका उपनाम "चासो" उनके नाम के अक्षरों (चागंटि से 'चा' और सोमयाजुलु से 'सो') से मिलकर बना है। उनका जन्म श्रीकाकुलम में कनुकोलनु लक्ष्मीनारायण सरमा और थुलसम्मा के यहाँ हुआ था। उनका नाम नरहरि राव रखा गया और १३ वर्ष की आयु तक उनके जैविक माता-पिता ने उनका पालन-पोषण किया। उनकी प्रारंभिक और मध्य विद्यालय की शिक्षा म्युनिसिपल हाई स्कूल, श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश में हुई।
तत्पश्चात् उन्हें चागंटि बापिराजू और थुलसम्मा ने गोद लिया और उनका नाम बदलकर सोमयाजुलु कर दिया गया। वह अपने दत्तक माता-पिता के साथ विजयनगरम आए और म्यूनिसिपल हाई स्कूल तथा महाराजा कॉलेज, विजयनगरम में शिक्षा प्राप्त की। उनकी पहली कहानी "चिन्नाजी" १९४२ में 'भारती' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद उन्होंने कई लघु कथाएँ और कविताएँ लिखीं, जिनकी रचनाओं का अन्य भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।
उन्होंने श्रीरंगम श्रीनिवास राव, श्रीरंगम नारायण बाबू और आचार्य रोनांकी अप्पलास्वामी जैसे कई साहित्यकारों और मित्रों को प्रभावित किया। वह लंबे समय तक आंध्र प्रदेश के प्रगतिशील लेखक संघ के सदस्य और अध्यक्ष रहे।