Yeshe Dorjee Thongchi येशे दोरजी थोंग्शी
येशे दरजे थोंगशी उत्तर-पूर्व के शेरदुपकेन आदिवासी समुदाय से आते हैं और अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी हैं। पढ़ाई-लिखाई असम में हुई, इसलिए असमिया ही उनकी अभिव्यक्ति की भाषा है। वे असमिया के प्रतिष्ठित साहित्यकारों में गिने जाते हैं और बहुभाषाविद् सर्जक हैं। अब तक उनके आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें ‘सोनाम’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का अवार्ड मिल चुका है। यह उपन्यास हिंदी में प्रकाशित है और 2005 में इस पर फिल्म भी बनी है। फिल्म राष्ट्रीय फिल्मोत्सव में राष्ट्रपति के ‘रजत कमल’ से सम्मानित है। ‘सोनाम’ भूटान और अरुणाचल के इलाके के पशुपालक ब्रोकपा कबीले के जीवन पर केंद्रित है। थोंगशी के एक अन्य उपन्यास ‘सब कोथा मनुः’ पर ‘भारंगम महोत्सव’ में नाट्य मंचन किया जा चुका है।
