Raja Radhikaraman Prasad Singh / राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह (10 सितम्बर 1890 – 24 मार्च 1971) द्विवेदी युग के प्रमुख हिन्दी कथाकार और उपन्यासकार थे। अपनी विशिष्ट कथा-शैली के कारण वे हिंदी कथा साहित्य में ‘शैली–सम्राट‘ के रूप में स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने 50 वर्षों तक हिन्दी साहित्य की महनीय सेवा की। उनका जन्म बिहार के शाहाबाद के सूर्यपुरा नामक स्थान पर प्रसिद्ध कायस्थ जमींदार राजा राजराजेश्वरी सिंह 'प्यारे' के यहाँ हुआ था।

कृतियाँ:
कहानी संग्रह: 'कुसुमांजलि', 'अपना पराया', 'गांधी टोपी', 'धर्मधुरी'
कहानियाँ: ‘गाँधी टोपी’ (1938), ‘सावनी समाँ’ (1938), ‘नारी क्या एक पहेली? (1951), ‘हवेली और झोपड़ी’ (1951), ‘देव और दानव’ (1951), ‘वे और हम’ (1956), ‘धर्म और मर्म’ (1959), ‘तब और अब’ (1958), ‘अबला क्या ऐसी सबला?’ (1962), ‘बिखरे मोती’ (भाग-1, 1965)।
उपन्यास: ‘राम-रहीम’ (1936), ‘पुरुष और नारी’ (1939), ‘सूरदास’ (1942), ‘संस्कार’ (1944), ‘पूरब और पश्चिम’ (1951), ‘चुंबन और चाँटा’ (1957)
लघु उपन्यास: ‘नवजीवन’ (1912), ‘तरंग’ (1920), ‘माया मिली न राम’ (1936), ‘मॉडर्न कौन, सुंदर कौन’ (1964), ‘अपनी-अपनी नजर’, ‘अपनी-अपनी डगर’ (1966)।
नाटक: ‘नये रिफारमर’ या ‘नवीन सुधारक’ (1911), ‘धर्म की धुरी’ (1952), ‘अपना पराया’ (1953), ‘नजर बदली बदल गये नजारे’ (1961)।
संस्मरण: 'सावनी सभा', 'टूटातारा', 'सूरदास'
गद्यकाव्य: 'नवजीवन', 'प्रेम लहरी'
गद्य कृतियाँ: 'नारी एक पहेली', 'पूरब और पश्चिम', 'हवेली और झोपड़ी', 'देव और दानव', 'वे और हम', 'धर्म और मर्म', 'तब और अब'

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह

आलोचनात्मक लेख

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह - हिन्दी कहानियाँ

Raja Radhikaraman Prasad Singh - Hindi Stories

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह - हिन्दी संस्मरण

Raja Radhikaraman Prasad Singh - Hindi Sansmaran

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह - हिन्दी निबंध

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