Butchi Babu / बुच्चिबाबु

शिवराजू वेंकट सुब्बाराव (१४ जून १९१६ - १९६७), जिन्हें उनके कलम नाम 'बुच्चि बाबू' के नाम से जाना जाता है, तेलुगु साहित्य के प्रसिद्ध लघु कथाकार, उपन्यासकार और चित्रकार थे। उनका जन्म एलुरु, आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने शुरू में अनंतपुर और विजाग में एक अंग्रेजी व्याख्याता के रूप में कार्य किया तथा १९४५ से १९६७ में अपनी मृत्यु तक ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) में भी सेवा दी। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री (एम.ए.) प्राप्त की थी और १९३७ में सुब्बालक्ष्मी से विवाह किया।

उनका उपन्यास 'चिवरकु मिगिलेदी' बुच्चि बाबू की सबसे प्रसिद्ध कृति है, जिसमें नायक की खोज और समाज के साथ संघर्ष के परिणामस्वरूप जीवन के मूल्यों का एक दर्दनाक पुनर्मूल्यांकन तथा अंततः आत्म-ज्ञान, स्वीकृति और शांति की प्राप्ति को दर्शाया गया है। वे एक विपुल लघु कथाकार थे; उनकी प्रसिद्ध लघु कथाओं में "नन्नू गुरिंची कड़ा व्रयवू?" ("क्या आप मेरे बारे में कहानी नहीं लिखेंगे?") और "एम नीडा" ("उसकी छाया") शामिल हैं। अन्य प्रमुख रचनाओं में "मरातुनाना मारपु रारु", "तदी मंतकु पोडिनेलु", "कविराजा विराजितम", "देसम नकिचिना संदेसम", "नोसंतन वृसीना व्रत", "इंतैना इन ऐदु", "वुडिना चक्रम-वादनी पुष्पम", और "ना गजुमेदा" प्रमुख हैं।

बुच्चि बाबू ने तेलुगु में "नन्नू मार्चिना पुस्तकम" ("द बुक दैट चेंज्ड मी") और "नीनू शंकरनारायण निघंटुवु" ("मी एंड शंकर नारायण डिक्शनरी") जैसे निबंध लिखे। उन्होंने कई रेडियो नाटक और मंच नाटक भी लिखे, और सावित्री तथा पुंडरीकाक्षय जैसी प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियों ने उनके मंच नाटकों (जैसे 'आत्मा वंचना') में अभिनय किया। इसके अलावा, वह एक विपुल चित्रकार थे, जिनकी अधिकांश पेंटिंग्स १९४०-१९६० के दौरान दक्षिणी भारत के ग्रामीण परिवेश और परिदृश्यों को दर्शाती हैं। उनके ग्रंथ 'शेक्सपियर साहित्य परमारसा' (शेक्सपियर के साहित्य पर एक आलोचना) ने उन्हें प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार (मरणोपरांत) दिलाया।

Butchi Babu / बुच्चिबाबु

बुच्चिबाबु - तेलुगु कहानियाँ हिन्दी में

Butchi Babu - Telugu Stories in Hindi