स्नेक प्लांट में फूल (बाल कहानी) : अनुराधा प्रियदर्शिनी
गोलू को गार्डेनिंग का बहुत शौक था और उसके छोटे से गार्डन में रात रानी, चंपा, चमेली, शमी, तुलसी, रबर प्लांट, पत्थरचट्टा जैसे ठेरों पौधे लगे हुए थे। उसमें से ज्यादातर पौधे उसने किसी पौधे की टहनी से काटकर उसको कलम करके लगाए थे तो कुछ नर्सरी से लेकर के आया था। कभीं गूगल तो कभीं लोगों से पूछ पूछकर वो तरह तरह के पौधे अपने घर लाता और उन्हे लगाकर बहुत खुश होता था।
पिछले कुछ दिनों से उसे स्नेक प्लांट बहुत ही लुभा रहा था। उसने पड़ोस में ही रहने वाले सक्सेना जी के घर में स्नेक प्लांट को देखा था। स्कूल कॉलेज और भी बहुत सारी जगहों पर उसने स्नेक प्लांट को देखा था। वो जान गया था कि स्नेक प्लांट को विपरीत परिस्थिति में भी लगा जा सकता है और उसकी बहुत ज्यादा देखभाल की भी आवश्यकता नहीं है। घर के भीतर ड्राइंग रूम में लगा दो या छत पर धूप में महीनों छोड़ दो। तभी से अब उसे स्नेक प्लांट घर पर लाना था। अपने इस हरे भरे गार्डेन के लिए।
आज शाम को जब वो पार्क में खेल रहा था तो उसने वहाँ भी स्नेक प्लांट को देखा जो अपनी अलग ही छटा बिखेर रहा था। उसका मन ललचाया कि क्यों न एक पत्ती तोड़ ले और उसे ही अपने घर के गार्डेन में रोपित कर दे। लेकिन नहीं, उस समय वो रूक गया।
जब घर लौट रहा था तो सक्सेना जी अपने पौधों को पानी दे रहे थे। वो रूककर स्नेक प्लांट की और भी जानकारी सक्सेना अंकल से ले लेना चाहता था। वो पूरा मन बना चुका था कि कुछ भी हो अब वो शीघ्र ही इसे अपने गार्डेन में जगह देगा।
सक्सेना जी कुछ पौधों की छँटाई भी करवा रहे थे। और जब उन्होंने गोलू का आकर्षण स्नेक प्लांट के लिए देखा तो उन्होंने उससे उन पौधों की दो पत्तियों को गोलू को दिया और बोला, “ गोलू बेटा अब तुम इन्हे अपने गार्डेन में लगा देना और देखो ये कैसे बढ़ते हैं।”
सक्सेना अंकल को धन्यवाद करते हुए वो अपने घर आ जाता है।
गोलू को तो मानो खजाना ही मिल गया हो। वो खुशी से उछल पड़ा। घर पहुँच कर अपनी माँ को आवाज लगाता है और बोलता है, “माँ आज हम इस पौधे को अपने गमले में लगाएंगे।”
अपनी माँ से अनुमति लेकर वो सीधे अपने गार्डेन की तरफ जाता है। वहाँ एक खाली गमले में थोड़ी मिट्टी भरकर स्नेक प्लांट का रोपण कर देता है।
उसकी माँ ने समझाया था बार बार किसी पौधे को डिस्टर्ब नहीं करते और ये तो बिल्कुल नया पौधा था। उसके भीतर उत्सुकता भी थी कि ये अभी गमले में लगा कि नहीं लगा। कहीं पानी ज्यादा न हो गया है। इसे धूप मिल रही या नहीं।
एक पौधे के रोपित होने के लिए जितनी भी महत्वपूर्ण बातें हैं सबका ध्यान रख रहा था। कुछ दिनों तक तो रोजाना देखता रहा फिर स्कूल के कामों में भूल गया। एक दिन जब वो अपने गार्डेन में और पौधों की निगरानी कर रहा था तब उसने देखा स्नेक प्लांट में एक और नई पत्ती निकल रही थी। उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।
उसने इस स्नेक प्लांट को लेकर बहुत सपने जो बुन रखे थे। कुछ अंतराल के बाद जब गमला स्नेक प्लांट से भर गया तब उसने बहुत ही आहिस्ता से उसमें से स्नेक प्लांट का एक पौधा निकाला और उसे अपने घर के अंदर भी प्यारे से डिजाइनर गमले में लगाकर ड्राइंग रूम में रख दिया।
सर्दियों का मौसम कुहरा बहुत छाया रहता था ऐसे में वो महीनों अपने गार्डेन में नहीं जा सका था। उसे याद जरूर आती थी लेकिन इधर परीक्षाओं का दबाव उसे इजाजत नहीं दे रहा था अपने शौक के साथ वक्त बिताने का।
जब परीक्षा समाप्त हुई गोलू यूँ ही अपने सभी पौधों का निरीक्षण कर रहा था कि उसने देखा सफेद रंग के बहुत ही प्यारे से फूल स्नेक प्लांट पर लगे थे। जो उसकी खुबसूरती को और भी बढ़ा रहे थे। पहले तो उसे लगा कोई और ही फूल होगा जिसे किसी ने यहाँ लगा दिया है। जो भी हो लग बहुत अच्छे रहे हैं।
और वो उन फूलों को बडी ही तल्लीनता से निहारने लगा। जब ध्यान से देखा तो वो फूल स्नेक प्लांट के ही थे जो उसकी पत्तियों के बीच से निकले थे।
अभी तक उसने ऐसा नजारा नहीं देखा था। वो बहुत खुश हुआ और सभी को अपने स्नेक प्लांट में आए फूलों की बात बताता और उन फूलों की तस्वीर दिखाता।
सचमुच यह एक अजूबा था और बहुत ही अनोखा और प्रकृति के विविधता को व्यक्त करता ये प्यारा सास्नेक प्लांट औ उसके ये प्यारे से फूल।
आज वह प्रकृति को दिल से धन्यवाद दे थहा था इस अनमोल पल का साक्षी बनने के लिये।