चूहे बिल्ली के दोस्त बन गये (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
जब चूहे बिल्ली को देखते। डर के कारण सारे चूहे बिल में घुस जाते। जब तक बिल्ली नहीं जाती सारे चूहे बिल में पड़े रहते । सब चूहों को चिंता हुई। बिल्ली के कारण सारे चूहे परेशान थे।
बिल्ली कई चूहों को खा गयी थी। इस प्रकार सब चूहों को चिंता में डूबे देखकर एक बूढ़ा चूहा ने सब चूहों को बुलाया और छोटी सी सभा की। सब चूहों ने अपनी समस्या बतायी।
बूढ़ा चूहा ने कहा कि हमारे पास अनुभव है। जिस व्यक्ति का पेट भरा रहता है। वह अतिरिक्त कुछ नहीं खायेगा।बिल्ली का पेट भरा रहेगा तो हम लोगों को नहीं खायेगी।
बुढ़ा चूहा बोला,--बिल्ली दूध खूब पसंद करती है, रघु चाचा की भैंस दूध देती है। रघु चाचा के घर में हम लोग रहते हैं। कटोरी में दूध रख दिया करेंगे। बिल्ली दूध पी लेगी। जब उसका पेट भर जायेगा। वह खुश हो जायेगी। तब हम लोगों को वह नहीं पकड़ेगी। +अगले दिन सबने मिलकर एक कटोरी दूध वहीं रख दिया। बिल्ली जब आयी। दूध देखकर खुश हो गयी। बिल्ली सारा दूध पी गयी। अब बिल्ली किसी चूहे को नहीं दौड़ाती। धीरे- धीरे सारे चूहे बिल्ली के पास आने लगे और सब चूहे बिल्ली के दोस्त बन गये।
बिल्ली बोली--तुम लोग रोज मुझे दूध दोगे, हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे। तुम सब मेरे दोस्त रहोगे। अब सब चूहे बिल्ली के साथ खूब मस्ती करने लगे और पक्का दोस्त बन गये।