व्यंग्य (111-) - महेश केशरी
Hindi Vyangya (111-) - Mahesh Keshri
जोमेटो ले आएगा - (व्यंग्य) - महेश केशरी
कहोगे कलियुग में ये आदमी प्रवचन दे रहा है। हो सकता है ना मानो मेरी बात। लेकिन हे मूर्ख इतना काहिल और जाहिल मत बन जाओ की अपने हक की बात सुनने से रह जाओ। सही भी है आज के समय में जब बाप- बेटा का नहीं, पति- पत्नी का नहीं, दोस्त -दोस्त का नहीं। तब ये समझाना तुम्हें मेरा उल्टा भी पड़ सकता है। हो सकता है निकालो लाठी और कर दो मेरी पिटाई। लेकिन ना दिखाओ इतनी ढ़िठाई। आज लोग बाप -को- बाप नहीं कहते बल्कि आज की दुनिया में रूपया ही बाप है। सारी समस्या की जड़ रूपया है।
जब लोग ज्यादा लगते हैं कमाने । तो रिश्तेदारों को लगते हैं भूलाने । जो भलाई का रास्ता दिखाता है।वही बुरा बन जाता है। जिस घर में पैसा ज्यादा आने लगता है।वहाँ क्लेश बढ़ जाता है। पैसा संबंधों में स्पीड ब्रेकर बन जाता है। सब फसाद की जड़ है पैसा। पैसा आदमी को अँधा बनाता है। संबंधों की लुटिया डुबाता है। आज हर पैसे वाला है दुखी। रोगी है उसकी काया। चैन गया है छीन . रात में आती नहीं नींद। भागते- भागते उसका बीतता है दिन। नींद आँखों से गायब है। शरीर में रहती है हरारत । रात को आती नहीं है नींद। पैसा ही मनमुटाव का कारण बन जाता है।संबंधों में कटुता लाता है। मतलबी हैं लोग मतलब के हैं रिश्ते। बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रूपया। ऐसा लोगों की सोच है। भाई ये जीवण में है सबसे बड़ी मोच। अगर गिर गए कभी रास्ते में उठाने ना आएगा कोई। जिसने पैसा पहचाना रिश्ते की खोई साख । बाद में पछताता है। हाथ उसके कुछ ना आता है। जिसका मन मलिन है। वो दिखता है भोग-विलास में तल्लीन। ऐसे लोग हमेशा रहते हैं दुखी । दुनिया में वही है सुखी। जिसके पास है , रिश्तों की जमा पूँजी। रिश्तों को बचाओ जीवण में सफलता की है बड़ी कुँजी। अगर बिस्तर पर पड़ जाओगे। तो रिश्ता ही बचाएगा। पैसा पानी लेकर बिस्तर पर नहीं आएगा। मुँह में दवाई नहीं खिला सकता पैसा। रोटी भी नहीं बना सकता है पैसा। कहोगे रोटी बाजार से आ जाएगी। जोमेटो ले आएगा। मान लो जोमेटो ले आएगा। लेकिन क्या मुँह में भी खिलाएगा। क्या सहारा देकर पैसा बिस्तर से उठाएगा। जब तक जवानी है। मानो कर लोगे ऐश। लेकिन जब आएगा बूढ़ापा तब याद आएगा अपनो का सहारा। इसलिए रिश्तों का दो महत्व। आज ही कर को संकल्प।
अगर रूपये को छोड़ दो तो रिश्ते जुड़े रहते हैं। रूपया जहाँ बीच में आया रिश्ते को खाया। पैसों से बनाओ दूरी कर लो जीवण को सुखी।
इश्क का बारहमासी बुखार - (व्यंग्य) - महेश केशरी
कहीं सास, दमाद को लेकर हो रही है फरार। कहीं ससुर, बहू का उतार रहा बुखार। बेटा गया है कमाने विदेश। ससुर और बहू कर रहें हैं , ऐश।
कम कमाओ लेकिन घर में ही रहो। नहीं तो धो दोगे तुम अपनी बीबी से हाथ। इश्क का आजकल लोगों को चढ़ा है बुखार। बुखार कुछ ऐसा है कि घर- घर में है इसका प्रभाव। संबंध जोड़ते समय करो लड़की और लड़के की जासूसी। हायर करो किसी शर्लक होमस को।
नहीं तो लाश मिलेगी नीले ड्रम में ढ़ूँसी। व्योमकेश बक्क्षी को जल्दी करो हायर। नहीं तो झेलो सामने से फायर।
दिमाग खुला रखो। आजकल किसी पर नहीं जताना है , विश्वास। नहीं तो होगा बेटा तुम्हारा सर्वनाश। चाहे वो तुमहारा लगता हो भाई, या कोई चाचा, या लगती हो ताई। प्रेमिका और पत्नी पर भी अब ना करना भरोसा। नहीं तो मिलोगे किसी खाई में लेटे ।
सोशल मीडिया में ऐसे प्रकरणों की चर्चा है। कि जीजा ने साली को अपने पर खर्चा है। इसको प्रेम कहना है ,बेकार। ऐसे संबंधों से होता है अपमान। सुखमय जीवण में आता है ,क्लेश। सामाजिक व्यवस्था में लोगों की हिल गई है चूल। रिश्तों में लोग जब से करने लगे हैं ऐसी भूल। भूल गए हैं लोग रिश्तों की मर्यादा। उनको मिटानी है दैहिक अभिलाषा। यही नहीं खत्म होती कहानी है। आजकल की बुढ़िया चार- चार बच्चों और पति को छोड़ अपने से आधे उम्र के लड़के के संग भागी है। गाँव में बखेड़ा है। लोगों ने घेरा है। अरे और क्या होगा लड़का और लड़की का ही झमेला है। चालीस की बुढ़िया पकड़ाई है। अपने बेटे की उम्र के प्रेमी के संग धरायी है। बेटा जब धराए हो चालीस की बुढ़िया के साथ। तो पंचायत भी लेगी अपना इंतकाम। जब गाँव में पकड़ाए हो रंगेहाथ। तो पंचायत के नियम से लेना होगा फेरे सात।
फेसबुक का प्यार लोगों को भा रहा है। इसीलिए देश हमारा रसातल में जा रहा है।
गाँव की गरिमा ना हो कलंकित। इसलिए गाँव वाले रहते हैं सशंकित । सिंदूर लगाने के बाद लड़का नहीं पकेगा , तंदूर में इसकी गारंटी है।
उनका कहना भी सही है। बिना सिंदूर के रिश्ता होता कलंकित है ।
सिंदूर का महत्व ऐसे घट रहा है। लोगों में जैसे ये राशन की तरह बंट रहा है। सिंदूर ऐसे बंट रहा है .मानो कोई चंदा है। लोगों ने बना लिया है, इसको अब धँधा है ।
लोग बूढ़ापे में अपने से आधे उम्र के लोगों से प्रेम कर ले रहें हैं। प्रेम की आड़ में हवस की रोटियाँ सेंक रहें हैं।
प्रेम करने वालों के बारे में आप सोच रहें होंगें बच्चे हैं। जी नहीं ऐसे लोग अक्ल के कच्चे हैं। बनते हैं समाज में ऐसे लोग खलनायक।ऐसे ही लोगों को हम कहते हैं नालायक।
लव एट फर्स्ट साइट - (व्यंग्य) - महेश केशरी
चँगूलाल मोबाइल प्रेमी जीव थे। उनका मोबाइल का "लव एट फर्स्ट साइट " वाला सीन था। लोग लड़कियों के के प्रेम में घायल होते हैं। लेकिन वो मोबाइल प्रेम में घायल थे।
महीनों वो पत्नी को देखे बिना रह सकते थे। लेकिन मोबाइल को देखे बिना नहीं। ऐसे में हीट वेव की एडवाइजरी से वो दुखी थे। चँगू लाल को और सब बातों से तो मतलब ना था। उनको बस देखने के लिए मोबाइल और खाने के लिए गुटखा मिल जाए इतना काफी था। चाहिए होगी किसी को तख्त। रखते होंगें लोग अमीर बनने की ख्वाहिश। लेकिन उनकी बस एक ही ख्वाहिश थी। वे रहें और उनका मोबाइल उनके साथ। ऐसे में हीट -वेव की एडवाइजरी जारी हुई थी। घर से बहुत जरूरी हो तभी निकलें। भाई घर से चँगू लाल ना निकलें तो दफ्तर कैसे जाएँ। आदमी काम ना करेगा तो भूखों मर जाएगा। दफ्तर में जब लोग ऊँघते तो चँगूलाल मोबाइल में घुस जाते। पानी की बोतल साथ में रखें। चँगू लाल अपने थैले में हमेशा पानी की एक बोतल रखते थे। पेय पदार्थों लस्सी , छाँछ , दही की शर्बत पीते रहें। मँहगाई की गर्मी ने पहले ही लोगों जूस निकाल दिया है। क्या लोग जूस पीएँ। मोबाइल का इस्तेमाल कम -से- कम करें। चँगूलाल ने एडवाजरी उल्टी ली। कम-सकम करने लगे। बस -बस यही बात जो उनको खटकती थी। मोबाइल से दूरी पर उनको वो गाना याद आ जाता था। "एक पल ,एक दिन जी सकेंगें ना हम एक दूजे की बिन।"
नींद तो अव्वल आती ना थी। आ भी जाती तो सपने में उनको वो गाना सुनाई देता। " मुझे नींद ना आए, नींद ना आए। मुझे चैन ना आए, चैन ना आए । कोई जाए जरा ढ़ूँढ़ के लाए। ना जाने कहाँ मोबाइल खो गया। हालत क्या है कैसे तुझे बताऊँ मैं। करवट बदल बदल के रात बिताऊँ मैं। पूछो जरा पूछो क्या हाल है। हाल मेरा बेहाल है। "
अव्वल मोबाइल तो खोया नहीं था। फिर भी मोबाइल के खोने की तरह का ही दुख था। उनको और जमाने से कोई मतलब नहीं था। मोबाइल का उनका जो प्रेम था। वो पहली नजर का प्रेम था। मोबाइल देखे बिना उनको चैन नहीं पड़ता था। सुबह उठते तो मोबाइल देखते मिलते। दोपहर को खाना खाते हुए भी मोबाइल देखते । बस मोबाइल- ही- मोबाइल था उनकी जिंदगी में। दोपहर में खाना खाकर पीठ सीधा करते समय भी मोबाइल पर नजरें जमीं रहतीं उनकी । पत्नी कहती कभी मोबाइल को छोड़ भी दिया करो। क्या दिनभर मोबाइल में ही घुसे रहते हो। चश्मे का नंबर बढ़ जाएगा। लेकिन इससे उनको कोई मतलब नहीं था। और जब काम नहीं कर रहे होते। तब भी वो मोबाइल ही देख रहे होते। रात में दो -तीन बजे तक मोबाइल देखते। और फिर मोबाइल देखते- देखते ही सो जाते।
कार चलाते वक्त मोबाइल का उपयोग ना करें। मोबाइल की बैटरी फट सकती है। और कार में आग लग सकती है। ये एडवाइजरी जब सुनी चँगूलाल ने तो चँगूलाल का मुँह लटक गया। लेकिन बजरंग बली का नाम लेकर उन्होंने मोबाइल कार में भी चलाना जारी रखा। सौ केस में ऐसा होता है जरूरी थोड़ी है मेरे साथ ही हो।
बैटरी के फटने से आप घायल भी हो सकते हैं। चँगू लाल तो मोबाइल प्रेम में पहले से ही घायल थे। दिल लगी दीवार से तो परी क्या चीज है। घायल तो वो पहले से ही थे। थोड़ा -बहुत हाथ -मुँह बैटरी फटने से ना जले तो वो भी भला कोई इश्क है। हाथ की नस काटने से बढ़िया है। थोबड़ा थोड़ा बहुत जल जाए। चँगूलाल मोबाइल से लव एट फर्स्ट साइट करते हैं। मोबाइल चँगूलाल से प्रेम थोड़े ही करता है।