सुजीत का नववर्ष (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Sujeet Ka Navvarsh (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
मोहल्ले में नए साल की धूम मचने वाली थी। सारे बच्चे इकट्ठे हो गए। "चलो, एक बड़ा सा केक कटवाते हैं!" रवि ने कहा। सबने जेब से पैसे निकाले और चंदा इकट्ठा किया। केक, गुब्बारे, टोपी—सब कुछ चमकदार प्लान बन गया।
लेकिन सुजीत उदास खड़ा था। वह मोहल्ले का सबसे गरीब लड़का था। उसके पास चंदा के लिए एक पैसा भी नहीं। "मैं... मैं नहीं दे पाऊंगा," आंसू भरी आंखों से बोला। सुजीत मिलनसार था, सबका दोस्त। पर आज दिल टूट रहा था।
रवि ने देखा। "अरे सुजीत, तू उदास क्यों?" पूछा। सुजीत ने सिर झुका लिया। तभी मीरा बोली, "सुजीत को मजाक मत उड़ाओ। वो हमारा भाई है!" सबने सिर हिलाया। कोई हंसा नहीं, कोई ताने नहीं मारे। "सुजीत, तेरे घर पर केक काटेंगे!" चिल्लाया रवि। सबने ताली बजाई।
सुजीत के छोटे से घर में चंदे के पैसे से बड़ा केक आया। मां ने चाय बनाई। गुब्बारे लटकाए। शाम ढली, तो मोहल्ला जगमगा उठा। सुजीत ने केक काटा। सबने गाया, "हैप्पी न्यू ईयर!" सुजीत की आंखें चमक उठीं। "धन्यवाद दोस्तों! तुमने दिखा दिया—दोस्ती में पैसा नहीं, दिल चलता है।"