राहुल को गलती का एहसास (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Rahul Ko Galti Ka Ehsaas (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
एक छोटे से गाँव के स्कूल में राहुल नाम का एक शरारती लड़का पढ़ता था। राहुल को चोरी करने की बुरी आदत पड़ गई थी। कभी किसी का कलम चुरा लेता, तो कभी किसी की किताब। सारे बच्चे परेशान हो जाते। "अरे, मेरा पेंसिल कहाँ गया?" कोई चिल्लाता, तो कोई उदास होकर रोने लगता। लेकिन राहुल को कोई फर्क न पड़ता। वह हँसता और भाग जाता।
स्कूल में नेहा नाम की एक गरीब लड़की भी पढ़ती थी। नेहा का बापू मजदूरी करता था। घर में बस एक पुरानी किताब थी, जिसे नेहा दिन-रात पढ़ती। एक दिन राहुल ने नेहा की किताब देखी। "वाह, कितनी सुंदर किताब!" उसने सोचा और चुपके से चुरा ली। नेहा को जब किताब न मिली, तो वह जोर-जोर से रोने लगी। "मेरी किताब! अब मैं कैसे पढ़ूँगी?"
अगले दिन नेहा स्कूल नहीं आई। तीसरे दिन भी नहीं। सबको पता चला कि नेहा किताब चोरी होने से उदास हो गई है। वह घर पर ही बैठी रहती है। राहुल को यह सुनकर बहुत बुरा लगा। रात भर नींद न आई। "यह सब मेरी वजह से हुआ," उसने सोचा। "नेहा गरीब है। उसके पास नई किताब कहाँ से आएगी? मैंने बड़ा गुनाह किया।"
अगले दिन राहुल टीचर के पास गया। "मैम, नेहा की किताब मैंने चुराई थी," उसने सिर झुकाकर कहा। "मुझे बहुत शर्म आ रही है। अब कभी चोरी नहीं करूँगा। यह लीजिए किताब।" टीचर ने राहुल की हिम्मत की तारीफ की। किताब नेहा को लौटा दी गई। नेहा खुशी से उछल पड़ी। "धन्यवाद राहुल भैया!" उसने कहा।
उस दिन से राहुल बदल गया। वह कभी चोरी न करता। सब बच्चे उसके दोस्त बन गए। नेहा भी रोज स्कूल आने लगी और अच्छे नंबर लाने लगी। सबने सीखा कि चोरी से दुख मिलता है, लेकिन गलती मानकर सुधार करने से सब कुछ ठीक हो जाता है।