राहुल और दादाजी (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Rahul Aur Dadaji (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक बार की बात है, राहुल नाम का एक नन्हा-मुन्ना बच्चा था। वह अपने दादाजी को बहुत प्यार करता था। दादाजी हर शाम राहुल को गोद में बिठाकर जंगल की, राजकुमारों की और जानवरों की मजेदार कहानियाँ सुनाते थे।

राहुल हँस-हँसकर लोटपोट हो जाता और दादाजी की गोद में सो जाता।लेकिन राहुल की मम्मी-पापा दिन-रात मोबाइल फोन में व्यस्त रहते। वे न तो राहुल से बात करते, न खेलते। राहुल उदास होकर कोने में बैठा रहता।

एक दिन मम्मी ने कहा, "राहुल, दादाजी से मत बात करना। हम जैसे तुमसे बात नहीं करते, वैसे ही तुम भी दादाजी से मत करना।" राहुल रो पड़ा, "मम्मी-पापा, आप तो फोन में खोए रहते हो। दादाजी ही तो मेरे दोस्त हैं!"

दादाजी ने सुना तो राहुल को गले लगाया। "बेटा, परिवार में प्यार और बातचीत सबसे बड़ी दौलत है। मोबाइल तो बस एक खिलौना है, लेकिन असली खुशी तो अपनों के साथ मिलकर होती है।"

उन्होंने एक कहानी सुनाई जिसमें एक बच्चा मोबाइल के चक्कर में दोस्त खो बैठा, लेकिन दादा-दादी की गोद में खुशियाँ पा लीं। मम्मी-पापा ने भी सुना तो शर्मिंदा हुए। उन्होंने फोन रख दिया और सबने मिलकर खेलना-हँसना शुरू किया।अब राहुल हमेशा खुश रहता।

उसने सीखा कि मोबाइल से ज्यादा कीमती है परिवार का समय। दादाजी की कहानियाँ सबको जोड़ने लगीं।संदेश बच्चों के लिए मोबाइल कम चलाओ, अपनों से बात करो।दादा-दादी की कहानियाँ सुनो, उनमें छुपी है जिंदगी की सीख।परिवार में प्यार बाँटो, खुशियाँ दोगुनी हो जाएँगी।

  • मुख्य पृष्ठ : जयचन्द प्रजापति 'जय' हिन्दी कहानियाँ, लघुकथाएँ और अन्य गद्य रचनाएँ
  • मुख्य पृष्ठ : संपूर्ण हिंदी कहानियां, नाटक, उपन्यास और अन्य गद्य कृतियां