परोपकार (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Propkar (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक बार की बात है, प्रयागराज के एक हरे-भरे बगीचे के पास छाता और छतरी रहते थे। छाता मजबूत और काला था, जो हमेशा सबकी रक्षा करता। छतरी रंग-बिरंगी और हल्की थी, जो नाचती-गाती फिरती। दोनों पति-पत्नी थे। वे कभी झगड़ा नहीं करते थे, बल्कि गाते-बजाते घूमते और जरूरतमंदों की मदद करते।

एक दिन बरसात का मौसम आया। दोनों बारिश का आनंद लेने निकले। "ला-ला-ला, बूंदें नाच रही हैं!" गाते हुए वे इधर-उधर घूमे। अचानक समोसे की दुकान दिखी। "वाह! गरम समोसे!" छाता ने कहा। उन्होंने स्वादिष्ट समोसे खाए, मीठी चटनी लगाई और ठंडा पानी पिया। छतरी बोली, "मजा आ गया, छाता जी! ऊपर से चटनी सोने में सुहागा!" दोनों हंस पड़े।

आगे बढ़े तो बारिश तेज हो गई। बगीचे में एक बूढ़ी दादी पानी से भीग रही थी। वह कांप रही थी और फूलों को बचाने की कोशिश कर रही थी। "अरे दादी, चिंता न करो!" छाता ने कहा। दोनों ने झट से दादी को अपने नीचे ढक लिया।

छतरी ने कहा, "हम यहाँ रहेंगे जब तक बारिश थमेगी।" दादी ने कहा, "बेटा, तुम्हारा परोपकार मुझे याद रहेगा।" बारिश रुकी तो दादी ने आशीर्वाद दिया, "तुम्हारा जीवन सदा खुशहाल रहे!"

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