प्रेम की भाषा की जीत (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Prem Ki Bhasha Ki Jeet (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक छोटे से गांव के स्कूल में सोनू नाम का एक शरारती लड़का पढ़ता था। सोनू बहुत चुलबुला था, लेकिन उसकी जुबान पर थोड़ी कड़वाहट रहती थी। एक दिन कक्षा में टीचर ने सोनू से होमवर्क के बारे में पूछा। सोनू ने बिना सोचे बदतमीजी से कहा, "मैंने नहीं किया! आपको क्या लेना-देना?"

टीचर बहुत नाराज हो गए। "सोनू, ऐसी भाषा शोभा नहीं देती!" उन्होंने डांटा। पूरी कक्षा सन्नाटे में आ गई। अगले दिन से सबने सोनू से बात करना बंद कर दिया। दोस्तों ने कहा, "सोनू, तू तो गाली-गलौज करता है। हम तेरे साथ नहीं खेलेंगे।"स्कूल में सोनू अकेला पड़ गया। नोटबुक मांगता तो कोई नहीं देता। लंच टाइम में सब अपने ग्रुप में हंसते-खेलते, लेकिन सोनू को कोई बुलाता नहीं। सब मुंह फेर लेते। सोनू उदास हो गया।

रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे सोचने लगा, "मेरी कठोर बातों ने ही सबको दूर कर दिया। गाली-गलौज से दोस्ती कहां टिकती है?"अगले दिन सोनू ने फैसला किया। वह सबसे प्रेम से मिला। "माफ करना दोस्तों, मैं गलत था। अब से प्रेम की भाषा बोलूंगा।" टीचर से बोला, "सर, मेरा होमवर्क तैयार है। मुझे माफ कर दें।" धीरे-धीरे सब पिघल गए। दोस्त फिर लौट आए। "सोनू, तू बदल गया है! चल, साथ खेलें।"

सोनू ने गाली-गलौज पूरी तरह छोड़ दिया। वह मिल-जुलकर रहने लगा, मेहनत से पढ़ने लगा। परीक्षा में वह कक्षा में प्रथम आ गया। सबने तालियां बजाईं। सोनू ने सीखा कि प्रेम की भाषा सबसे बड़ी ताकत है।

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