पेड़ों की सभा (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Pedon Ki Sabha (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक छोटे से हरे-भरे गांव में बहुत सारे पेड़ थे। ये पेड़ आम, जामुन, अमरूद और नींबू जैसे स्वादिष्ट फल देते थे। बच्चे खेलते-खेलते फल तोड़ते, और बूढ़े लकड़ियां इकट्ठा करते। सब खुश थे।

एक दिन सरकारी लोग आए और बोले, "ये पेड़ रास्ते में आ रहे हैं, इन्हें काटना पड़ेगा!" पेड़ों ने रोते हुए गांववालों से कहा, "हम आपको फल देते हैं, छाया देते हैं, ऑक्सीजन देते हैं। फिर हमें क्यों काट रहे हो?" गांववालों ने सरकार से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई न हुई।

अगले ही दिन कई पेड़ कट गए।बचे हुए पेड़ों ने गुप्त सभा बुलाई। सबसे बड़ा पीपल पेड़ बोला, "भाइयों, हम फल देकर भी कट रहे हैं। अब से किसी को फल नहीं देंगे! फलेंगें नहीं, बस पत्तियां बढ़ाएंगे।" सबने हामी भरी।अगले साल फल ही नहीं आए। बच्चे रोने लगे, "फल कहां गए?" मां-बाप दुखी हुए। बाजार में फल मंहगे हो गए। सब परेशान।

एक दिन गांव के चौपाल पर पेड़ों की आवाज गूंजी, "हम फल देते थे, फिर भी हमें काटा। अब तुम्हें पता चला न प्रकृति का महत्व?"गांववालों ने शर्मिंदा होकर सरकार को पत्र लिखा।

सरकार ने तुरंत आदेश जारी किया, "कोई पेड़ नहीं कटेगा! पेड़ लगाओ, बचाओ!" पेड़ खुश हुए और फिर से फल लद गए। गांव फिर हरा-भरा हो गया। बच्चे चिल्लाने लगे, "पेड़ हमारे दोस्त हैं!"

तब से गांववालों ने सीखा – पेड़ काटना मत, लगाओ और बचाओ। प्रकृति हमें सब देती है, हमें भी उसकी रक्षा करनी चाहिए।

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