पश्चाताप (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Pashchatap (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
रितु को तितलियाँ बहुत अच्छी लगती थीं, पर वह उनके साथ गलत खेल खेलता था। वह तितलियों को पकड़कर उनके रंग-बिरंगे पंख तोड़ देता था। बेचारी तितलियाँ फड़फड़ाकर जमीन पर गिर जातीं, उड़ नहीं पातीं, पर रितु को यह देखकर बहुत मजा आता।रितु का दोस्त शनि यह सब देखकर दुखी हो जाता।
एक दिन शनि ने कहा, “रितु, यह बहुत गंदा काम है। तितलियाँ भी तो हम जैसे जीती-जागती होती हैं। जब तुम उनके पंख तोड़ते हो, उन्हें बहुत कष्ट होता है। सोचो, उनके घर कैसे जाएँगी?” लेकिन रितु ने हँसकर बात टाल दी, “अरे, ये तो छोटी-सी तितलियाँ हैं, इन्हें क्या होगा!”
कुछ दिन बाद रितु अपनी साइकिल पर तेज-तेज जा रहा था। अचानक पीछे से एक स्कूटर ने हल्की-सी टक्कर मार दी। रितु गिर पड़ा और उसका पैर चोटिल हो गया, वह उठ नहीं पा रहा था। उसके पैर में इतनी जोर की चोट लगी कि वह दर्द से कराहने लगा, “आह! मेरा पैर… मैं कैसे चलूँ? मैं घर कैसे जाऊँ?”तभी वहाँ शनि दौड़ता हुआ आया। उसने रितु को उठाने की कोशिश की। रितु रोते हुए बोला, “शनि, मैं चल नहीं पा रहा… मैं घर कैसे जाऊँ?”
शनि ने गंभीर होकर कहा, “जैसे तितलियाँ जाती हैं, जब तुम उनके पंख तोड़ देते थे… याद है? वे भी तो अपने घर जाना चाहती थीं, पर उड़ नहीं पाती थीं।”शनि की बात सुनकर रितु चुप हो गया। उसे उन सब तितलियों की याद आ गई जिनके पंख उसने तोड़े थे। उसे लगा जैसे तितलियाँ भी उसी की तरह दर्द से रो रही हों।
रितु की आँखों में आँसू आ गए।उसने धीमी आवाज में कहा, “शनि, मुझसे बहुत गलती हो गई। मैंने तितलियों के साथ बहुत बुरा किया। शायद आज मेरी ये चोट भी उसी गलत काम का परिणाम है। मैं वादा करता हूँ, अब कभी किसी तितली, किसी जानवर या किसी भी छोटे जीव को तकलीफ नहीं दूँगा। प्लीज़, मुझे माफ कर दो।”शनि ने मुस्कुराते हुए उसका कंधा थाम लिया, “गलती मान लेना ही सबसे बड़ी बहादुरी है, रितु। चलो, पहले तुम्हें अस्पताल ले चलते हैं।”
शनि ने लोगों की मदद से रितु को अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टर ने उसका पैर पट्टी से बाँध दिया और आराम करने को कहा।कुछ दिनों बाद जब रितु ठीक हो गया, तो वह बगीचे में गया। वहाँ उसे फिर एक तितली दिखी। इस बार उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, पर पकड़ने के लिए नहीं, धीरे से तितली को देखने के लिए। तितली फूल पर बैठी थी और हवा में अपने पंख हिला रही थी।रितु ने मुस्कुराकर कहा, “अब से मैं तुम्हारा दोस्त हूँ। मैं किसी का पंख नहीं तोड़ूँगा, बस तुम्हें उड़ते हुए देखूँगा।”
तितली जैसे उसकी बात समझ गई हो, हल्के से उड़कर आसमान में चली गई।अब रितु जब भी कोई तितली देखता, तो उसे प्यार से उड़ने देता और अपने दोस्तों से कहता, “छोटे-छोटे जीवों को तकलीफ देना बहुत बुरी बात है। वे बोल नहीं पाते, पर दर्द उन्हें भी उतना ही होता है जितना हमें होता है।”और सचमुच, उस दिन के बाद रितु सबका, यहाँ तक कि छोटी-सी तितली का भी सच्चा दोस्त बन गया।