Neele Nishan Wala Aadami : Lok-Katha (Canada)

नीले निशान वाला आदमी : लोक-कथा (कैनेडा)

(ब्लड इंडियन्स उत्तरी अमेरिका के रेड इन्डियन्स में सबसे अधिक ताकतवर और गुस्से वाले लोग हैं। रेड इन्डियम्स की रैवन आदि की कहानियाँ तो दुनियाँ बनाने से सम्बन्धित हैं परन्तु इन ब्लड इन्डियन्स की कहानियाँ साधारण प्रकार की कहानियाँ हैं। लगता है कि इन लोगों के यहाँ 4 नम्बर बड़ा पवित्र माना जाता है जैसे 3 नम्बर भारतीय और यूरोपियन लोगों में पवित्र समझा जाता है। इस पुस्तक की पहली कहानी में भैंस का कटरा4-4 बार नाचता है और आदमी की माँ भी 4 बार कहती है कि “ओ नीले निशान वाले, यह तेरा धुआँ है।”)

एक बार की बात है कि एक आदमी कहीं जा रहा था कि उसको एक भैंस कीचड़ में फँसी दिखायी दे गयी। उसको उस भैंस पर दया आ गयी।

पास में ही उसको एक डंडा पड़ा दिखायी दे गया तो उसने उस डंडे से उस भैंस को कोंचना शुरू कर दिया। कुछ पल बाद ही वह भैंस कूदी और उस कीचड़ से बाहर निकल गयी।

आदमी यह देख कर बहुत खुश हुआ कि वह भैंस की सहायता कर सका। भैंस को निकाल कर आदमी अपने रास्ते चला गया और भैंस अपने रास्ते चली गयी।

इस बात को काफी समय बीत गया। वसन्त आया। सभी भैंसों ने अपने अपने बच्चों को जन्म दिया। उस भैंस ने भी एक कटरे को जन्म दिया जो कीचड़ में फँस गयी थी।

यह कटरा जब थोड़ा बड़ा हुआ तो अपने साथी बछड़ों के साथ खेलने लगा। पर दूसरे बछड़े अपने छोटे छोटे सींग मार कर उसको छेड़ते और कहते — “तू भैंस का बच्चा नहीं है। तू तो आदमी का बच्चा है।”

कटरे ने जा कर यह सब अपनी माँ से कहा तो उसकी माँ ने कहा — “अगर ऐसी बात है तो हम तुम्हारे पिता की तलाश करेंगे।” और दोनों माँ बेटे उस कटरे के पिता को ढूँढने निकल पड़े।

काफी दिनों तक इधर उधर घूमते रहने के बाद वे एक घाटी में बसे एक गाँव में आये। उस कटरे ने आदमी का रूप रख कर उस गाँव के बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। दिन भर वह उनके साथ खेलता और शाम को वह पास के पेड़ों के एक झुंड की तरफ चला जाता ।

गाँव में किसी को भी यह पता नहीं था कि वह बच्चा कौन है, कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है। एक आदमी की उस बच्चे के बारे में जानने की इच्छा हुई तो उसने बच्चों से उस बच्चे से उसके बारे में पूछने के लिये कहा।

अगले दिन जब वह बच्चा आया तो दूसरे बच्चों ने उस बच्चे से पूछा — “तुम इधर उधर क्यों घूमते रहते हो?”

बच्चे ने जवाब दिया — “मैं अपने पिता को खोज रहा हूँ।”

लोगों ने कहा कि यदि ऐसा है तो हमें उसको सब घरों में ले कर जाना चाहिये ताकि वह अपने पिता को पहचान सके। एक शाम उन लोगों ने गाँव के सभी शादीशुदा आदमियों को एक जगह इकट्ठा किया और उस लड़के को बुला कर पूछा — “बोलो बेटे, इनमें से तुम्हारा पिता कौन है?”

लड़के ने सब की तरफ देख कर कहा — “कोई नहीं।”

फिर गाँव के सभी कुँआरे आदमियों को इकट्ठा किया गया और तब उस लड़के से पूछा गया — “अब बताओ बेटे, क्या इनमें से कोई तुम्हारा पिता है?”

लड़के ने अब की बार चारों ओर देख कर एक आदमी की तरफ इशारा करके कहा — “जी यह हैं मेरे पिता।”

वहाँ आये हुए सभी लोगों को खाना खिलाया गया। उस आदमी की थाली में जिसकी तरफ उस बच्चे ने इशारा किया था अधिक खाना परोसा गया ताकि वह अपने बेटे को अपने साथ खाना खिला सके।

वह लड़का उस आदमी के पास बैठा हुआ था और वह आदमी यह सोच रहा था कि वह लड़का उसके पास क्यों बैठा हुआ था। जब सब लोग खाना खा चुके तो वे सभी वहाँ से चल दिये।

लड़का उस आदमी से बोला — “आइये, आप मेरे साथ आइये।” और वह लड़का उस आदमी को गाँव के बाहर ले जा कर बोला — “मैं अपने पिता को ढूँढ रहा था सो आज वह मुझे मिल गये। आप ही हैं मेरे पिता।”

वह आदमी तो यह सुन कर वह आदमी हक्का बक्का रह गया। उसने सोचा कि मैं तो किसी स्त्री को जानता तक नहीं फिर मेरा यह बच्चा कहाँ से आ गया।

इस आदमी के चेहरे पर एक नीला निशान था। उसने ध्यान से देखा तो उसको वैसा ही एक नीला निशान उस लड़के के चेहरे पर भी दिखायी दिया।

पर इससे उसकी यह गुत्थी अभी भी नहीं सुलझी कि जब वह किसी स्त्री को जानता तक नहीं था तो फिर यह लड़का उसका कैसे हुआ।

लड़का फिर बोला — “देखिये, मैं अपनी माँ को लाने जा रहा हूँ। वह आपको देखते ही आपको मारने दौड़ेगी पर आप डरियेगा नहीं बस आप उसके दोनों सींग पकड़ लीजियेगा। आइये आप ज़रा इस खुली जगह में आ जाइये।”

वह आदमी खुली जगह की तरफ बढ़ा ही था कि इतने में ही उस बच्चे की माँ भैंस आ गयी और उस आदमी को मारने दौड़ी। आदमी को लड़के की बात याद आ गयी और उसने निडर होकर उस भैंस के दोनों सींग पकड़ लिये। आश्चर्य, सींग पकड़ते ही वह भैंस गायब हो गयी और उसके सामने एक सुन्दर स्त्री खड़ी थी।

तब उस स्त्री ने उस आदमी को सारी कहानी सुनायी और उसको बताया कि देखो इस लड़के का चेहरा तुम्हारे जैसा ही है। अब उस आदमी की कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि यह सब कैसे हुआ होगा। वह उन दोनों को घर ले आया। काफी दिनों तक वे साथ साथ रहे।

उस आदमी के पास दो चिड़ियाँ थीं – एक कौआ और एक मैना । दोनों चिड़ियें उस लड़के के दोनों कंधों पर बैठ कर उसके साथ खूब खेलती थीं।

एक दिन उस स्त्री ने उस आदमी को बताया — “तुम मुझे किसी भी चीज़ से मार सकते हो, पीट सकते हो पर न तो मुझे कभी किसी नुकीली चीज़ से मारना और न मेरे ऊपर कभी राख फेंकना।”

आदमी ने कहा “ठीक है।” इस बीच उस आदमी के माता पिता भी उस बच्चे को बहुत प्यार करने लगे थे।

एक दिन वह आदमी अपनी पत्नी से किसी बात पर बहुत नाराज हो गया। उसने चूल्हे से एक जलती हुई लकड़ी उठायी और उससे उस स्त्री को डराना चाहा।

स्त्री और उसके बेटे ने जब वह लकड़ी देखी तो दोनों डर के मारे बाहर की तरफ भागे। वह आदमी भी उनके पीछे पीछे भागा परन्तु तब तक वे दोनों भैंस और कटरे में बदल चुके थे और दोनों ही वहाँ से जंगल की तरफ भाग गये थे।

लड़के के दादी और बाबा अपने पोते को इधर उधर ढूँढ रहे थे। कौआ और मैना भी उस लड़के को उड़ उड़ कर इधर उधर ढूँढने की कोशिश कर रहे थे। पर वह तो उनको न मिलना था न मिला।

उस आदमी की माँ रो कर बोली — “तुमने जरूर ही मेरे पोते के साथ कुछ बुरा किया है। जब तुम्हारी पत्नी ने पहले से तुमको कह रखा था कि उसको कभी नुकीली चीज़ से नहीं मारना तो तुम उसको जलती हुई लकड़ी से मारने क्यों दौड़े? वह जादू जानती थी पर तुम नहीं माने और देखो अब वे दोनों ही कहीं चले गये हैं।”

इस पर वह आदमी बोला — “अच्छा माँ तुम परेशान मत हो मैं उन दोनों को ढूँढने की कोशिश करता हूँ। अगर मैं कुछ समय तक न लौटूँ तो मेरी चिड़ियों को मेरे पीछे भेज देना।

और अगर वे मेरी कोई छोटी से छोटी चीज़ भी ले आयें तो मेरे बिछौने पर रख कर उसको ढक देना और अपने पाइप में तम्बाकू जला कर उसका धुँआ मेरी उस चीज़ की तरफ उड़ा कर चार बार कहना — “ओ नीले निशान वाले, यह तेरा धुँआ है।” यह कह कर वह आदमी वहाँ से चला गया।

काफी समय इधर उधर घूमने के बाद उसको भैंसों का एक बड़ा सा झुंड दिखायी दिया। ध्यान से देखने पर उसको लगा कि उनमें से एक भैंस अपने कटरे के साथ दूसरी भैंसों से कुछ अलग सी अकेली बैठी है। उसे लगा कि शायद वही उसकी पत्नी और लड़का है। उसने भैंस का गोबर अपने शरीर पर लपेट लिया और भैंसों के पानी पीने की जगह पर एक गड्ढे में छिप कर बैठ गया।

पहले सारी भैंसें पानी पीने आयीं फिर उनके बच्चे पानी पीने आये। बस उसने अपने वाले बच्चे को पकड़ लिया। बच्चा अपने पिता को देख कर बहुत खुश हुआ और बोला — “मैं अपनी माँ को जा कर बताता हूँ।”

वह दौड़ा दौड़ा अपनी माँ के पास गया और जा कर उससे बोला — “माँ, पिता जी आ गये।”

भैंस उसके पास आयी तो वह बोला — “मैं तुम्हें लेने आया हूँ।”

भैंस बोली — “मुझे अपने सरदार से पूछ लेने दो। अगर वह हाँ कह देगा तभी मैं तुम्हारे साथ जाऊँगी। तुमने हमारे साथ अच्छा नहीं किया। हम लोग राख और चाकू से बहुत डरते हैं। तुमने सचमुच ही हमारे साथ बहुत ही बुरा किया है।”

वह कटरा उस समूह के सरदार के पास गया, उसने उससे कुछ बात की और वापस आ कर बोला — “सरदार कहते हैं कि एक नाच होगा जो चार बार होगा और अगर चारों बार आपने मुझे पहचान लिया तो हम सब अपने घर वापस जा सकते हैं।”

जब भैंसों के सारे बच्चे नाच के लिये इकट्ठा हुए तो उस आदमी का बेटा अपने पिता से बोला — “पहली बार मैं अपनी पूँछ मोड़ कर नाचूँगा। दूसरी बार मैं अपने आगे वाले पैरों में से एक पैर उठा कर नाचूँगा।

तीसरी बार मैं अपने दोनों कान नीचे करके नाचूँगा और चौथी बार मैं अपनी आँखें बन्द करके नाचूँगा। बस इसी तरीके से आप मुझे पहचान लीजियेगा।”

तीन बार तो उस आदमी ने अपने बेटे को पहचान लिया परन्तु चौथी बार में सभी बच्चों ने अपनी आँखें बन्द कर लीं इससे वह उसको नहीं पहचान सका।

सारे बच्चे उस आदमी के ऊपर दौड़ पड़े और उसको कुचल कुचल कर मार डाला। जब उसके शरीर का कोई भी हिस्सा नहीं बचा तो वे सब वहाँ से चले गये।

उधर काफी दिन के बाद भी जब वह आदमी घर वापस नहीं लौटा तो उसकी माँ ने उसकी चिड़ियों को छोड़ दिया। कुछ समय बाद वे उसके माँस का एक टुकड़ा ले कर घर वापस लौट आयीं।

माँ ने अपने बेटे के कहे अनुसार उसके माँस के टुकड़े को उसके बिछौने में रख कर उसको ढक दिया और पाइप से तम्बाकू जलाते हुए धुँआ उसकी ओर उड़ाते हुए बोली — “ओ नीले निशान वाले, यह तेरा धुँआ है।” ऐसा उसने चार बार कहा।

माँ के ऐसा कहते ही वह आदमी तुरन्त ही अपने बिछौने में से बाहर निकल आया और बोला — “माँ, मुझे दुख है कि मैं तेरे लिये कुछ भी नहीं कर पाया। मैं तेरे पोते को वापस नहीं ला सका।”

(अनुवाद : सुषमा गुप्ता)

 
 
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