मुर्गों की चतुराई (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Murgon Ki Chaturai (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में सारे मुर्गे बहुत दुखी थे। हर रोज आदमी उन्हें पकड़-पकड़कर खा जाते थे। उनके परिवार बर्बाद हो रहे थे, और कोई सुनने वाला न था। आखिरकार, मुर्गों ने फैसला किया कि वे सरकार से शिकायत करेंगे। लेकिन शिकायत कैसे लिखें?
वे गांव के सबसे होशियार लड़के गोलू के पास पहुंचे। गोलू पढ़ने में तेज था और हमेशा अच्छे विचार लाता था। मुर्गों ने अपनी आपबीती सुनाई। गोलू ने कान खड़े किए और मुस्कुराया। "चिंता मत करो, दोस्तों," उसने कहा। "तुम अपनी-अपनी मुर्गियों से कहो कि अंडा देना बंद कर दें। देश की अर्थव्यवस्था अंडों पर टिकी है। जब व्यापार ठप हो जाएगा, तो सरकार खुद तुम्हारी रक्षा करेगी!"मुर्गे खुश होकर लौटे।
उन्होंने सारी मुर्गियों को इकट्ठा किया और गोलू का संदेश दिया। अगले ही दिन से कोई मुर्गी ने अंडा नहीं दिया। बाजारों में अंडे गायब हो गए। दुकानें बंद पड़ गईं, व्यापारी परेशान हो गए।
खबर पूरे देश में फैल गई। अखबारों में सुर्खियां चमकीं: "अंडा संकट! अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही!"सरकार ने फौरन मीटिंग बुलाई। "ये मुर्गे देश की संपत्ति हैं," प्रधानमंत्री ने कहा। "उन्हें मारने वालों को फांसी की सजा मिलेगी!" कानून बन गया। मुर्गों को सुरक्षा मिली।
वे अब खुलेआम घूमने लगे, और मुर्गियां भी सुरक्षित रहीं।एक बड़ा समारोह हुआ। गांव के मैदान में सारे मुर्गे इकट्ठे हुए। गोलू को सम्मानित किया गया।
मुर्गों ने चिल्लाकर कहा, "गोलू भैया जिंदाबाद! चतुराई से जीत हासिल की!" गोलू ने हंसते हुए कहा, "बुद्धि से हर समस्या का हल निकल जाता है।" इस तरह, मुर्गे खुशहाल जीवन जीने लगे, और गोलू गांव का हीरो बन गया।