मुर्गे की गलती (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Murge Ki Galti (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
एक छोटे से गांव में एक मुर्गा रहता था, जिसका नाम था बिहारी। बिहारी हर भोर रात में जोर-जोर से बोलता, "कुक्कड़ू-कू!"। पूरा गांव उसके इस स्वर से जाग जाता। किसान खेत की तैयारी करने लगते, बच्चे स्कूल के लिए तैयार होते, और सब खुश होते कि बिहारी समय का पहरुआ है।
गांव में लाला रामू नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह रोज सुबह बिहारी को गालियां देता। "चुप हो जा तू, नींद खराब कर दी!" वह चिल्लाता। बिहारी उदास हो जाता, लेकिन अगली सुबह फिर वही करता – क्योंकि यही उसका काम था।
एक दिन लाला रामू के बेटे छोटू की स्कूल परीक्षा थी। छोटू बहुत खुश था, रात को जल्दी सो गया। लेकिन उस रात बिहारी बीमार पड़ गया। भोर होने पर भी वह नहीं बोला। लाला रामू और छोटू गहरी नींद में सोते रहे। जब आंख खुली तो सूरज ऊंचा चढ़ चुका था! परीक्षा का समय निकल गया था।
लाला रामू गुस्से से तिलमिला उठा। वह बाहर आया और बिहारी को देखा। "अरे मुर्गे! तेरी वजह से मेरे बेटे की परीक्षा छूट गई। तू आज क्यों नहीं बोला?" बिहारी ने कमजोर आवाज में कहा, "मैं बीमार था, लेकिन अब ठीक हूं।"छोटू ने पापा से कहा, "पापा, रोज आप ही तो मुर्गे को डांटते थे। आज जब वह चुप रहा तो समय का पता ही न चला।"
लाला रामू को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह शर्मिंदा हो गया और बिहारी को दाना खिलाया। "माफ करना बिहारी, तू हमारा दोस्त है। तेरा स्वर हमें समय बताता है।"उस दिन से लाला रामू ने कभी बिहारी को गाली नहीं दी।
गांव वाले भी समझ गए कि जो चीज रोज परेशान करती लगे, वही कभी-कभी बहुत जरूरी होती है।