मीठा खाने की सीख (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Meetha Khane Ki Seekh (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
चींटा अपने बच्चों के साथ एक शादी की बारात में गया। बारात का माहौल बहुत ही खुशहाल था, बच्चों के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी।
बारात के पास एक मेज पर ढेर सारे रसगुल्ले रखे थे। बच्चे जब रसगुल्ले देखे तो उनके मुँह में पानी आ गया। वे सब रसगुल्ले खाने के लिए एक साथ उस तरफ भागे।
चींटा पापा ने बच्चों को रोका और बोला, “बच्चो, थोड़ा ध्यान रखो। ज्यादा मीठा खाने से पेट खराब हो सकता है।”लेकिन बच्चे अपनी मस्ती में पापा की बात ध्यान नहीं दिए, और बिना रुके रसगुल्ले खाने लगे।
जल्दी ही बच्चों का पेट दर्द रहने लगा।सब बच्चे परेशान हो गए और बोला, “पापा, आपकी बात सही थी। हमें आपकी मना करने की वजह समझ में आ गई। अब आगे से आपकी बात मानेंगे।”
चींटा पापा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बच्चो, मैं हमेशा तुम्हारे भले के लिए ही बातें करता हूँ। जो बच्चे अपने पापा की बात नहीं मानते, वे मुश्किल में पड़ जाते हैं।”