मतलबी बंदर और उदार खरगोश (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Matlabi Bandar Aur Udaar Khargosh (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

जंगल के एक हरे-भरे कोने में खरगोश और बंदर रहते थे। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। खरगोश दयालु और मेहमाननवाज था, जबकि बंदर शरारती लेकिन मतलबी।

एक दिन बंदर का दिन बहुत बुरा हो गया। तूफान आया और उसके सारे केले बह गए। भूखा-प्यासा बंदर खरगोश के बिल पर पहुंचा। "दोस्त, मेरे पास कुछ नहीं बचा!" वह रोया।

खरगोश ने बिना सोचे अपनी आखिरी दो रोटियां दीं और गर्म चाय पिलाई। बंदर पेट भरकर बोला, "तू सबसे अच्छा दोस्त है! मैं कभी न भूलूंगा।"कुछ दिनों बाद खरगोश की बारी आई। भेड़िए ने उसके बिल पर कब्जा कर लिया।

भूखा खरगोश बंदर के पेड़ पर चढ़ा। "दोस्त, मेरे दिन खराब हैं। थोड़े केले दे दो!" लेकिन बंदर ने ऊपर से झांका और मुंह बना लिया। "मुझे समय नहीं है!" कहकर वह चुपके से दूसरी डाल पर चला गया, जैसे खरगोश को जानता ही न हो।

खरगोश उदास होकर लौट गया।बाकी जंगल के जानवरों ने यह देखा। हिरण बोला, "बंदर मतलबी है!" गिलहरी ने कहा, "सच्चा दोस्त मुसीबत में साथ देता है।" खरगोश ने सबको इकट्ठा किया और एक योजना बनाई।

अगले दिन खरगोश ने बंदर के पास जाकर कहा, "दोस्त, मेरे पास एक जादुई आम का पेड़ मिला है! आओ साथ देखें।" बंदर लालच में आ गया और चला। लेकिन वहां कुछ नहीं था—सिर्फ खरगोश के दोस्त जानवर इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बंदर को घेर लिया और खरगोश की दयालुता की कहानी सुनाई।

बंदर शर्मिंदा हो गया। "मैं गलत था। अब से सच्चा दोस्त बनूंगा!"बंदर ने खरगोश को ढेर सारे केले दिए। दोनों फिर दोस्त बने, लेकिन बंदर ने सीख ली—मतलबी दोस्ती कभी टिकती नहीं।

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