माधवी का जन्मदिन (बाल कहानी) : अनुराधा प्रियदर्शिनी
Madhavi Ka Janmdin (Baal Kahani) : Anuradha Priyadarshini
दीपावली के अगले दिन शिवानी के पापा की ट्रेनिंग का मेल आ गया जो भोपाल में होनी थी। यह देखकर शिवानी थोड़ी उदास हो गई क्योंकि 2 दिन बाद ही उसकी बहन माधवी का पहला जन्मदिन था जो अब उसे अपने पापा के बिना मानना पड़ता। लेकिन इस बात से उसके पापा भी थोड़े उदास हो गए तब उन्होंने सेंट्रल पुलिस एकेडमी भोपाल में पता किया की ट्रेनिंग में अकेले जा सकते हैं या परिवार को भी लाया जा सकता है। वहां के कर्मचारी ने बताया की यहां लोग अपने परिवार और बच्चों को ला सकते हैं और ट्रेनिंग के पश्चात घूमने जा सकते हैं जिसकी व्यवस्था यहां पर उपलब्ध करवा दी जाएगी। परंतु, इसके एक्स्ट्रा चार्जेस लगेंगे……
शिवानी के पापा ने कहा ठीक है एक्स्ट्रा चार्ज दे देंगे और उन्होंने भोपाल जाने के लिए दो टिकट और करवा लिए जो उनकी पत्नी और बेटी शिवानी के नाम का था। इधर दिवाली की तैयारी थी ऊपर से भोपाल जाना वह भी बच्चों को लेकर………
राहत इतनी थी की अक्टूबर के महीने में इतनी ठंड नहीं होती ऐसे में गर्म कपड़ों की आवश्यकता नहीं थी। आनन-फानन में जरूरी कागजात के साथ कपड़ों को पैक किया गया जो रात्रि में पूरा नहीं हो पाया था और कुछ पैकिंग सुबह करनी थी । इधर शिवानी और माधवी को नींद आ रही थी उन्हें सुलाना भी अनिवार्य था। माधवी चुँकि गोद में थी और अपनी माँ के साथ ही सोती थी तो सभी कार्य छोड़कर उसे सुलाना जरूरी था।
MNGLA LKSDP EXPRESS मथुरा में सुबह साढ़े छः बजे आनी थी जो भोपाल में शाम तक पहुंचा देती लेकिन आज 22 अक्टूबर को जब सुबह मोबाइल पर स्टेटस देखा तो पता चला कि ट्रेन का रास्ता बदल दिया गया है शिवानी के पापा ने राधिका से कहा सब छोड़कर बस जल्दी से तैयार हो जाओ हमें आगरा से ट्रेन पकड़नी पड़ेंगी क्योंकि वो अब मथुरा नहीं आ रही है। अब समस्या यह थी कि दोनों बच्चों को जगाना तैयार करना और समय से आगरा स्टेशन पहुंच पाना आसान नहीं था। फिर भी राधिका ने कहा ठीक है मैं बस नहाकर आ रही फिर चलते हैं बच्चों को गोद में ले लेंगे। और नहाने चली गई। जब बाथरूम से बाहर आयी तो शिवानी के पापा ने कहा आराम से रहो हम इस ट्रेन से नहीं जा रहे।
राधिका ने कहा ठीक है आप चले जाओ आपकी ट्रेनिंग है हम नहीं जाएंगे। इसपर उन्होंने कहा नहीं हम भोपाल जाएंगे लेकिन आज शाम को दूसरी ट्रेन से…..
देखो भोपाल जाने का रिजर्वेशन हो गया तत्काल में।
कौन सी ट्रेन है……
तेलंगाना एक्सप्रेस जो यहां साढ़े पांच बजे आएगी और भोपाल में रात्रि डेढ़ बजे उतार देगी।
ठीक है अब जल्दी से आज का खाना बना लेते हैं फिर शाम के लिए भी बनाना होगा।
लगभग चार बजे हमलोग मथुरा स्टेशन के लिए निकले वहां जाकर पता चला ट्रेन एक घंटा देरी से आएगी। ट्रेन को आने में उस दिन रात्रि के साढ़े आठ बजे गए। अपनी सीट पर बैठकर उन लोगों ने भोजन किया और माधवी को दूध बनाकर दिया । लेक्टोजन की उपलब्धता ने बच्चों के लिए दूध की समस्या को बहुत हद तक कम कर दिया है बस गर्म पानी की व्यवस्था हो फिर क्या दूध बनकर तैयार हो जाता है।
धीरे धीरे सभी यात्री सोने की तैयारी करने लगे राधिका शिवानी और उसके पापा भी अपनी अपनी सीट पर जाकर सो गए।
ग्वालियर में एक आदमी चढ़ा था जिसने राधिका से कहा जब आपको उतरना होगा बता दीजियेगा मैं अपनी सामान हटा दूंगा। राधिका ने भी थोड़ी लापरवाही दिखाते हुए कहा ठीक है और सो गई।
ट्रेन अपनी तीव्र गति से चलती रही और लगभग साढ़े चार बजे भोपाल जंक्शन पर रूकी। शिवानी अपने पापा और मम्मी के साथ भोपाल जंक्शन पर उतर गई।
वहाँ से केंद्रीय पुलिस अकादमी भोपाल की दूरी लगभग पैंतीस किलोमीटर थी।
CPAT जाने के लिए एक बुलेरो आधे घंटे में आ गई जिसपर बैठकर शिवानी और माधवी अपने मम्मी पापा के साथ सुबह की बेला में अकादमी पहुंच गए। 23 तारिख हो चुकी थी और अब नौ बजे शिवानी के पापा ट्रेनिंग में चले गए। शाम को लगभग साढ़े छः बजे वो लोग कैंटीन से कुछ आवश्यक सामग्री ले आए और अगले दिन साँची का स्तूप देखने के लिए गए। जो कि भारत की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है जिसको यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
शाम को शिवानी के बर्थडे का केक भी काटा गया और पूरी अकादमी में प्रशिक्षण लेने आए प्रशिक्षुओं के साथ आज माधवी का पहला जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाया गया। सभी ने माधवी को खूब आशिर्वाद और शुभकामनाएं दी। पूरी अकादमी के लोगों के साथ आज माधवी का जन्मदिन बहुत खास हो गया था।