हास्य-व्यंग्य (81-) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Hindi Hasya-Vyangya (81-) : Jaychand Prajapati Jay
नेताजी की साइकिल से चलने की योजना (हास्य-व्यंग्य)
मेरे नेताओ और युध्द करो। मजा लो अपनी शक्ति और बुध्दि का। अब लौट आये न पुराने दिनों में। साइकिल से आफिस जाओ। साइकिल से चलने का नाटक करो। पेट्रोल बचाओ। घरेलू चीजों का इस्तेमाल करो। चटनी चावल खाओ। पहलवानी करो। देशी गुड़ खाओ। गन्ने का रस पीओ और दूध,दही खाओ। गाय,भैंस पालो।
नेताजी खुद फंस गये हैं। सरकारी आदेश है। पेट्रोल की बचत करो और आफिस साइकिल से जाओ। स्वदेशी अपनाओ। नेताजी घबड़ा गये हैं। जनता के बीच में इंसल्ट होना है। ससुरी के यही दिन देखना था। लक्जरी गाड़ी खरीदे थे। सायरन बजते जब गाड़ी टोले-मोहल्ले में जाती तो अपना रुतबा होता था।
नेताजी आज साइकिल से आफिस निकले। सिक्युरिटी भी साइकिल से निकला। कितनी बेइज्जती हो रही है। जनता हमारी असलियत जान जायेगी। जनता हमसे नहीं डरेगी। नेता की औकात जिस दिन जनता जान जायेगी। एक-एक मांस गिध्द की तरह नोंच-नोंच कर खा जायेगी।
नेताजी कैमरे वाले से कह रहे हैं। हर एंगल से फोटो खींच लो ताकि दुनिया के लोग जाने कि नेताजी बहुत गंभीर प्राणी हैं। देश के बारे में सोंच रहे हैं। ये हमारा जमीनी नेता है। हमारे लिए कितना संघर्ष कर रहा है। नेताजी के भागदौड़ में कोई कमी नहीं है। सच्चा जनप्रतिनिधि है।
नेताजी की अंतरात्मा जाग गयी। नेताजी एक चमचे से कहा कि पूरे महीने भर की फोटो हर एंगल से निकलवा लीजिए। प्रत्येक दिन की एक-एक खबर अखबार मे प्रतिदिन निकलवा दिया जायेगा। जनता को मैसेज देना है। जनता को बेवकूफ बनाना है। जनता साइकिल से चलेगी।
बाकी हम लोग पीछे के रास्ते से लक्जरी कार से चलेंगे। यार ऐसा करो कि शर्मा जी की पेट्रोल टंकी ही खरीद लो। पेट्रोल हम नेता यूज करेंगे। जनता को पेट्रोल नहीं मिलेगी तो खुद- ब-खुद साइकिल पर होगी। जब सब साइकिल से चलेंगे तो अपनी योजना कामयाब हो जायेगी।