हास्य-व्यंग्य (101-) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Hindi Hasya-Vyangya (101-) : Jaychand Prajapati Jay

पद्म पुरस्कार के लिए प्रतीक्षारत कवि (हास्य-व्यंग्य)

कवि चुन्नीलाल एक वरिष्ठ कवि हैं। कई साल जिंदगी का साहित्य में गंवा दिये। उम्र का अंतिम पड़ाव है। कब पके आम की तरह जमींदोज हो जाये। कोई नहीं जानता। वे स्वयं तक नहीं जानते।

उनकी कविताओं में संयोग रस से लेकर वियोग की समस्त रूप रंगों की कल्पनाओं में ढालकर कविताओं में उकेर देने की अलग कल्पनाशीलता है। आज तक चुन्नीलाल का मुकाबला कोई नहीं कर सका।

इनकी काव्य की दुनिया में इनकी एक बेहतरीन दुकान है। जब हर तरह की काव्य पंक्तियाँ पिरो-पिरोकर लिखते हैं तो समस्त देवी-देवता तक भी इनकी काव्य रचनाओं के मुरीद हो जाते हैं। साहित्य की इस दुकान में एक से बढ़कर एक काव्य उपलब्ध है।

ऐसे उदार महामना के कवि चुन्नीलाल पद्म पुरस्कार की प्रतीक्षा में है। उनकी आत्मा की आवाज निकल पड़ी है। अब काहे सरकार देर कर रही है। पोथियों का अम्बार लगा दिया हूँ। इतना काव्य लेखन कर दिया पर मेरा दरद न जाणे कोय। मेरी दशा तो मीरा के दरद से भी दर्दीला है।

हर जगह वेटिंग सिस्टम काम कर रहा है। इसका स्वाद बहुत मीठा होता है। कवि महोदय इसी परिपाटी को लेकर चल रहे हैं। परम्परा का निर्वहन करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं। सांस के अंतिम समय तक पद्म पाने की प्रतीक्षा कवि चुन्नीलाल को रहेगी।

तस्वीर के चक्कर में बदला सुर (हास्य-व्यंग्य)

एक कवयित्री ने युवा उम्र की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट कर दी। कोई भी चित्र देखता उसके प्रति स्नेह जागृत हो उठता। ऐसी सुंदर तस्वीर देखकर उम्रदराज लोगों के हृदय में हलचल सी मच गयी। एक से एक महारथी प्रेम के खूबसूरत-खूबसूरत शब्दों से टिप्पणी उनके टिप्पणी बाक्स में करने लगे।

जिसने भी तस्वीर देखा। तारीफों का ऐसा पूल बांध रहे थे कि पूरी उम्र गुजारने को तैयार हैं। जीवन की समस्त कमाई देवी के चरणों में समर्पित करने को तैयार हैं। कई कवियों ने तो मिलने की शुभमुहूर्त निकालने की बात कर दी। बहुत कवियों को उम्मीद मिलने की नजर आने लगी।

कुछ बुजुर्ग कवियों ने तो बालों की कटाई-छंटाई पहले से करा ली। मेकअप भी करवा डाले। टूटे दांत भी लगवा लिये। कवयित्री के नजरों में वृध्द नहीं दिखाई देना चाहते थे। कुछ ने तो भावुक अपील की। कई सालों से विरह की वेदना में जल रहा हूँ। एक बार हमारी आपकी मुलाकात हमारे लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगा।

एक से रहा न गया। सौगंध तक खा डाली। पूरा ख्याल रखूंगा। जो साड़ी कहेंगी । वो भी एक नहीं पूरी दुकान ही खरीदकर दे दूंगा। सादगी वाले आदमी हैं। शराब तो हाथ नहीं लगाते। गलत संगत मेरी नहीं रही। सच कहूं। एक बार गलत संगत में पढ़ गया था। आधी जिंदगी बर्बाद हो गयी। आधी बची जिंदगी को निष्ठापूर्वक जीने को तैयार हूँ।

इस तरह की कमेंट सुनकर कवयित्री सुन्नावस्था महसूस किया। कवयित्री बेचारी भयभीत हो गयी। इस तरह की उम्मीद नहीं थी कि ऐसा-ऐसा कमेंट देखने को मिलेगा। लोगों की आंख की पट्टी हटाने के लिए कवयित्री ने जल्दी से अपनी असली उम्र की तस्वीर पोस्ट की और लिखा कि इस साल वह साठ साल की हो गयीं हैं। इसके पहले की तस्वीर युवाकाल की थी।

अपनी जिंदगी की नई पारी खेलने वाले को गंभीर धक्का लगा। कुछ को हृदयाघात हुआ। कुछ ने अपनी किस्मत पर मस्तक ठोंका। बाजी हाथ से निकल गयी। कुछ ने उधर मुंह फेर लिया। कुछ ने ठंडा पानी पिया। कवयित्री ने भी राहत की सांस ली। इतनी बड़ी संख्या में आये आफर से शर्मिंदगी महसूस की। अब कभी भी सौंदर्य से युक्त तस्वीर न डालने का अटल फैसला लिया।