रसूल हमज़ातोव (रसूल गमज़ातोव - रसूल हमज़ातफ़) अवार भाषा के प्रसिद्ध सोवियत कवि और लेखक थे, जिनका जन्म 08 सितम्बर 1923 को रूस के दाग़िस्तान प्रदेश के त्सादा गाँव में हुआ था। अस्सी बरस की उम्र में 03 नवम्बर 2003 को उनका देहान्त हुआ। उनके पिता एक मस्जिद में इमाम थे और उन्हें दाग़िस्तान का लोककवि माना जाता था। 1939 में स्थानीय अध्यापन संस्थान में शिक्षा पूरी करने के बाद रसूल अध्यापक बन गए। लेकिन जल्दी ही उन्हें रेडियो पर पत्रकार की नौकरी मिल गई। बाद में उन्होंने मसक्वा के गोरिकी साहित्य संस्थान से रचनात्मक लेखन में एम० ए० किया। 1962 में उन्होंने सांसद पद के लिए चुनाव जीत लिया और सोवियत संसद में दाग़िस्तान का प्रतिनिधित्व करने लगे। वे एशिया और अफ़्रीकी लेखक संघ के अध्यक्ष रहे। उन की कविता 'ज़ुरावली' सारे रूस में गायी जाती है। उन को 'द स्टेट स्टालिन प्राईज़' १९५२ में, 'द लैनिन प्राईज़ '१९६३ और 'लार्रीएट आव द इंटरनैशनल बोतेव प्राईज़' १९८१ में मिला। हम उनको, उनकी रचना 'मेरा दाग़िसतान' के लिए ज्यादा जानते हैं। देहान्त के बाद दग़िस्तान के तर्की तऊ पहाड़ की तलहटी में तर्की क़ब्रिस्तान में उन्हें दफ़नाया गया था, जहाँ उनका मक़बरा बना हुआ है।