Rajendra Bala Ghosh (Bang Mahila) / राजेन्द्र बाला घोष (बंग महिला)
राजेन्द्र बाला घोष (1882 – 24 फरवरी 1951) हिंदी-नवजागरण की पहली छापामार लेखिका थीं। उन्होंने अपने आक्रामक लेखन द्वारा पुरुष-सत्तात्मक समाज की रूढ़ियों पर प्रहार किया। वे 'बंग महिला' के छद्मनाम से लिखा करती थीं।
उनका जन्म 1882 में वाराणसी में एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रामप्रसन्न घोष तथा माता का नाम नीदरवासिनी घोष था। बचपन में उन्हें 'रानी' और 'चारुबाला' कहा जाता था। उनका विवाह पूर्णचन्द्र देव के साथ हुआ। डॉ. रामचंद्र शुक्ल ने उन्हें 'बंग महिला' नाम से संबोधित करना आरंभ किया था। बांग्ला में वे 'प्रवासिनी' नाम से लिखती थीं।
1904 से 1917 तक उनकी रचनाएँ विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं। अपने दो बच्चों और 1916 में पति के असमय निधन के आघात से वे बुरी तरह टूट गईं। 24 फरवरी 1951 को मिर्जापुर में उनका देहांत हुआ।
हिंदी की पहली कहानी मानी जाने वाली रचनाओं में उनकी प्रसिद्ध कहानी 'दुलाई वाली' (1907, सरस्वती पत्रिका) प्रमुख है। उन्होंने स्त्री-शिक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों पर खुलकर लिखा।
प्रमुख कृतियाँ:
कहानियाँ: चंद्रदेव से मेरी बातें (1904), कुंभ में छोटी बहू (1906), दुलाईवाली (1907), भाई-बहन (1908), दलिया (1909), हृदय परीक्षा, मन की दृढ़ता
कहानी संग्रह: कुसुम
जीवनी साहित्य: जोधाबाई, अबुल फजल, बैकुण्ठ दास