E. Harikumar / ई. हरिकुमार

ई. हरिकुमार (१३ जुलाई १९४३ - २४ मार्च २०२०) मलयालम उपन्यासकार और लघु कथाकार थे। उनका जन्म कालीकट और कोच्चि के बीच एक तटीय शहर पोनानी में हुआ। हरिकुमार के पिता प्रसिद्ध कवि और नाटककार एडासेरी गोविंदन नायर और माता ई. जानकी अम्मा थीं, जिन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में कविताएँ और कहानियाँ लिखी थीं और टैगोर की ‘फ्रूट गैदरिंग’ का मलयालम में अनुवाद किया था। हरिकुमार १९९८ से २००६ तक दो कार्यकाल के लिए केरल सरकार के सांस्कृतिक विभाग के तहत अग्रणी साहित्यिक संस्थान, केरल साहित्य अकादमी के सदस्य थे। १९८८ में उन्हें कहानी संग्रह ‘डायनोसार कुट्टी’ के लिए साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला। उन्होंने १३ कहानी संग्रह, ९ उपन्यास और १ संस्मरण की रचना की है।

प्रमुख पुरस्कार:
- ‘दिनोसारिन्ते कुट्टी’ (द डायनासोर्स बेबी) नामक लघु कथाओं के संकलन के लिए वर्ष १९८८ का साहित्य अकादमी पुरस्कार।
- वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कहानी ‘पच्छपयिन पिडिक्कन’ के लिए १९९७ में पद्मराजन पुरस्कार (एक टिड्डे को पकड़ने के लिए)।
- १९९८ में ‘सूक्शिचु वाचा मयिलपीली’ (मयूर पंख कीमती) पुस्तक के लिए नलप्पडन पुरस्कार।
- २००६ में ‘अनिथायुदे वीदु’ (अनीता हाउस) पुस्तक के लिए कथापीडम पुरस्कार।
- २०१२ में टीवी फिल्म ‘श्रीपर्वथियुडे पदम’ (देवी श्रीपार्वती के पवित्र पैर) के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी हेतु केरल राज्य चलचित्र अकादमी पुरस्कार।

E. Harikumar / ई. हरिकुमार

ई. हरिकुमार - कहानियाँ हिन्दी में

E. Harikumar - Stories in Hindi