Balshauri Reddy / बालशौरि रेड्डी
बालशौरि रेड्डी (१ जुलाई, १९२८ - १५ सितंबर, २०१५) का जन्म ग्राम मोल्लल गुडर, जिला—कडपा, आंध्र प्रदेश में हुआ था। वे मूलतः तेलुगु भाषी हैं। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा नेल्लोर एवं कडपा से तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद व वाराणसी में पूरी हुई।
हिंदी प्रचार सभा, मद्रास; भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता; हिंदी अकादमी, हैदराबाद तथा अन्य संस्थाओं से सम्बद्ध रहे श्री रेड्डी ने २३ वर्षों तक बच्चों की लोकप्रिय हिंदी पत्रिका ‘चंदामामा’ का सम्पादन किया। उनके नाम लगभग दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। कथा-साहित्य के अलावा उन्होंने प्रचुर मात्रा में बाल-साहित्य का भी लेखन किया है। ‘शबरी’, ‘ज़िन्दगी की राह’, ‘बैरिस्टर’, ‘प्रकाश और परछाईं’ आदि उनके चर्चित उपन्यास हैं।
मौलिक लेखन के अलावा उन्होंने तेलुगु की अनेक रचनाओं का हिंदी में और हिंदी की रचनाओं का तेलुगु में अनुवाद किया है। अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत बालशौरि जी को देश-विदेश के दर्जनों पुरस्कार प्राप्त हुए हैं; जैसे—‘राजर्षि पुरुषोत्तम दास पुरस्कार’, ‘गणेशशंकर विद्यार्थी पुरस्कार’, ‘केरल साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ आदि।