गलती का एहसास (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Galti Ka Ehsas (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

लौकी की शादी थी। बारात में सारी सब्जियाँ बड़ी खुशी से आईं। गाजर, टमाटर, मटर, और फूलगोभी सब शोर मचाते हुए पहुंची। लेकिन बैंगन कहीं नहीं दिखा।

लौकी ने बैंगन को फोन किया और पूछा, "बैंगन भैया, आप मेरी शादी में क्यों नहीं आए? हमें बहुत इंतजार किया आपको देखने के लिए।"

बैंगन ने धीरे से जवाब दिया, "लौकी, तुमने मुझे सिर्फ व्हाट्सएप पर निमंत्रण भेजा था। असली निमंत्रण तो दिल से, घर जाकर दिया जाता है। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं।"

लौकी ने सोचा, "मैंने ये बात नहीं समझी। मैंने सोचा व्हाट्सएप से ही सब ठीक हो जाएगा।"बैंगन ने मुस्कुराकर कहा, "जब कोई घर पर आकर निमंत्रण देता है, तो हम खुश होते हैं। हम महसूस करते हैं कि वह हमारे रिश्ते की कदर करता है।"

लौकी की आँखों में आंसू आ गए। उसने विनम्र होकर कहा, "मुझे शर्म आती है कि मैंने तुम्हारे साथ ऐसा किया। अब से मैं हर किसी को दिल से बुलाऊंगी।"

बैंगन ने उसे दुलार दिया और बोला, "कोई बात नहीं, गलती सभी से होती है। अब चलो मिलकर शादी की खुशी मनाते हैं।"लौकी ने सीखा कि रिश्ते निभाने के लिए दिल से जुड़ना जरूरी है, न कि सिर्फ टेक्नोलॉजी से।

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