गधे की मस्ती (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Gadhe Ki Masti (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक जंगल के पास एक छोटा सा गधा रहता था। नाम था उसका गुड्डू। बचपन में गुड्डू खूब मस्ती करता। इधर-उधर घूमता, आवारागर्दी करता। नदियों में कूदता, पहाड़ों पर चढ़ता।

मम्मी गधिया कहती, "बेटा, पढ़ाई करो, कुछ सीखो!" लेकिन गुड्डू हंसता और भाग जाता।समय बीता। गुड्डू बड़ा हो गया। अब खेलने का समय नहीं था।

गांव के धोबी ने उसे नौकरी पर रख लिया। सुबह से शाम तक भारी-भारी कपड़े लादे जाते। पीठ दुखती, पैर थक जाते।

एक दिन इतना भारी बोझ लदा कि गुड्डू का जबड़ा ही फैल गया! दर्द से चिल्लाया गुड्डू, "अरे! बचपन की मस्ती ने मुझे बर्बाद कर दिया!"

तब गुड्डू को समझ आया। जो बचपन में मस्ती ही करते रहते हैं, बड़े होकर जीवन की मार झेलते हैं।

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