दुष्ट के साथ दुष्टता (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Dusht Ke Saath Dushtata (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
एक जंगल में दो दोस्त कौए रहते थे। एक छोटा कौआ था, नाम था चिंटू, और दूसरा बड़ा कौआ था, नाम था मिंटू। चिंटू हमेशा बीमार-बीमार सा रहता था।
एक दिन चिंटू को तेज बुखार हो गया। मिंटू आया और जोर-जोर से चिल्लाने लगा, "काँव-काँव! काँव-काँव!" पूरा जंगल गूंज उठा।चिंटू ने कमजोर आवाज में कहा, "भैया, चुप हो जाओ ना! मेरी तबीयत खराब है, तुम्हारी चीख से और दर्द हो रहा है।"
लेकिन मिंटू माना नहीं। वह रोज आता और चिल्लाता। चिंटू उदास हो गया। एक दिन मिंटू को ही तेज सिरदर्द हो गया। वह पेड़ पर लेटा विलख रहा था। तभी चिंटू उड़ता हुआ आया। मिंटू ने कहा, "चिंटू भाई, चुप रहो। मत चिल्लाना, मेरा सिर फट रहा है।"
लेकिन चिंटू ने मिंटू की नकल उतारी। वह जोर-जोर से चिल्लाया, "काँव-काँव! काँव-काँव! दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए!"मिंटू घबरा गया। उसका सिर और दुखने लगा। आखिरकार उसने माफी मांगी, "माफ कर दो चिंटू! अब से मैं कभी किसी की बीमारी में चिल्लाऊंगा नहीं।".
चिंटू हंस पड़ा और बोला, "ठीक है भैया, लेकिन याद रखना – दूसरों के दुख में शोर मत मचाओ।"उस दिन से दोनों दोस्तों ने एक-दूसरे का ख्याल रखना सीख लिया। जंगल में सब कहते, "दोस्ती में दया जरूरी है!"