दो शब्द (भूमिका-फ़लक) : मंगला रामचंद्रन

Do Shabd (Bhoomika-Falak) : Mangala Ramachandran

(लॉकडॉउन में की गई शारीरिक एवं मानसिक यात्राओं का दस्‍तावेज)

कहते हैं कि जब हम स्‍वयं को आईने में अधिक देखने लगते हैं तो अपने अंदर झांकना छोड़ देते हैं। बाह्य खूबसूरती बढ़ाने की हमारी कोशिशों की आधी भी अगर हम आंतरिक खूबसूरती, आतंरिक शांति पाने में करने लगे तो जीवन, परिवार, समाज की खूबसूरती कई गुना बढ़ जायेगी। प्रकृति की स्‍वाभाविकता हमने नष्‍ट की ही साथ जीवन में भी सहजता और सरलता को छोड़कर नकली और असहजता की ओर बढ़ गये। तन सजाते सजाते हमारा मन सूना ही रह गया।

सन् 2020 में कोविद – उन्‍नीस ने दस्‍तक देकर पूरे विश्‍व में लगभग एक सी तबाही मचाई। तब लॉकडाउन ने एक मौका दिया कि हम तीन पीढ़ी या कहीं-कहीं चार या पांच पीढ़ी साथ, एक छत के नीचे रहें। ये समय प्रत्‍येक के लिए आत्‍मपरीक्षण का एक मौका भी दे रहा था। और हर पीढ़ी का दूसरी पीढ़ी को समझने का भी। इस दृष्टि से देखा जाये तो कठोर सज़ा की तरह दिखता ये लॉकडाउन दूसरे रूप में प्रकृति का ही उपहार है, भले ही सरकारें इसे लागू करें। क्‍या पिछले एक-सवा साल ने हमें पारिवारिक रूप से और अधिक मजबूत नहीं किया, जीवन में विभिन्‍न रंग नहीं फैलाये? समाज के कमज़ोर वर्ग के प्रति करूणा का नया वेग उबल पड़ा और हम अपने हिस्‍से में से बांट कर आंतरिक प्रसन्‍नता और सूकून महसूस करने लगे। साथ ही जो भी रचनात्‍मक क्षेत्र से सरोकार रखते हैं उनकी रचनात्‍मकता में निश्चित ही वृदि्ध हुई होगी।

मेरे इस नये संग्रह मे दो तीन कहानियों को छोड़कर सारी रचनायें पिछले एक वर्ष की उपलब्धि है। कुछ सीधे ‘कोरोना’ से जुड़ी हुई हैं और कुछ परोक्ष रूप से। परोक्ष इसलि‍ए कि, जब मनोरंजन के लिए पूरा परिवार साथ रहा, बहुत सी नई- पुरानी बातें हुई तो कई यादें, कई लोग और उनसे जुड़ी घटनाएं कहानियों के रूप में मानों कह रही हों हमें ‘फलक’ पर उतारेा। जब सब कुछ शांत था, मेहमान नदारद थे पर गौरेया का झुंड उसी तरह चावल चुगने और पानी में अठखेलियां करने आता रहा और बालकनी को अपने चहचहाहट से गुलज़ार किये रहा। ‘फलक’ एक छोटी सी कहानी, नन्‍हीं सी गौरेया की, पर इसी ने शुरूआत् करवाई बड़े से फ़लक को तैयार करने की। फ़लक का एक अर्थ असमान भी होता है और आसमान तो हर एक के लिए अपने पूर्ण विस्‍तार के साथ सदैव प्रस्‍तुत है। सारे सामंजस्‍य एक हो गये तो मेरी लेखनी ने दृष्‍टता कर ही दी और तैयार हो गया कहानी संग्रह ‘फलक’, जो मेरे प्रिय पाठकों को समर्पित है। पाठक इसे कहानियों के पात्रों की तरफ से प्रस्‍तुत विचारों की तरह ही पढ़े, ये मेरे विचार हैं ऐसा कतई न सोचें।

एक तरह से पिछले एक वर्ष के कोविड 19 और उससे जुड़े lockdown में की गई शारीरिक एवं मानसिक यात्राओं का दस्तावेज़ है फ़लक। जो मेरे सहृदय पाठकों को सस्नेह समर्पित है।

- मंगला रामचंद्रन

  • मंगला रामचंद्रन : कहानियाँ हिन्दी में
  • तमिल कहानियां और लोक कथाएं
  • मुख्य पृष्ठ : भारत के विभिन्न प्रदेशों, भाषाओं और विदेशी लोक कथाएं
  • मुख्य पृष्ठ : संपूर्ण हिंदी कहानियां, नाटक, उपन्यास और अन्य गद्य कृतियां