बच्चे नकलची होते हैं (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'
Bachche Nakalachi Hote Hain (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'
एक गाँव में राधेश्याम नाम का आदमी रहता था। वह मेहनती था और परिवार का अच्छे से ख्याल रखता था, लेकिन उसे एक बुरी आदत थी – वह बात-बात पर गाली देता था। कभी पत्नी को, कभी बच्चों को, तो कभी पड़ोसियों को भी।राधेश्याम के दो बच्चे थे – मोनू और गुड़िया।
शुरू–शुरू में वे पिता की गालियाँ सुनकर डर जाते थे, पर धीरे-धीरे वही शब्द दोहराने लगे। अब जब वे आपस में लड़ते, तो एक-दूसरे को गाली देते। कभी-कभी गुस्से में पिता को भी उल्टा जवाब सुना देते।एक दिन खेलते-खेलते मोनू ने झुंझलाकर राधेश्याम को ही गाली दे दी। यह सुनकर राधेश्याम सन्न रह गया।
उसे लगा, “मेरे ही बच्चे मुझे ऐसे शब्द कह रहे हैं, ये तो मैंने ही इन्हें सिखाए हैं।”उसे बहुत पछतावा हुआ। उसने निश्चय किया कि अब वह किसी को गाली नहीं देगा।अगले दिन से जब भी उसे गुस्सा आता, वह गहरी साँस लेकर धीरे से कहता, “बेटा, अगली बार ध्यान रखना।”
कुछ ही दिनों में घर बदल गया। जहाँ पहले शोर और झगड़े होते थे, वहाँ अब हँसी और मीठी बातें सुनाई देतीं।राधेश्याम बच्चों से कहता, “बेटा, जैसे बीज बोओगे, वैसा ही पेड़ उगेगा। मीठे शब्द बोओगे, तो प्यार और खुशी उगेगी।" बच्चे नकलची होते हैं।