अमित सुधर गया (बाल-कहानी) : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Amit Sudhar Gaya (Hindi Children Story) : Jaychand Prajapati 'Jay'

एक शहर में अमित नाम का एक नटखट लड़का रहता था। वह स्कूल जाता तो था, लेकिन पढ़ाई से ज्यादा दोस्तों के साथ खेलने-कूदने में व्यस्त रहता। मम्मी कहतीं, "बेटा, होमवर्क कर लो।" पापा चिल्लाते, "पढ़ाई पर ध्यान दो, आवारा घुमना बंद करो!" लेकिन अमित हंसकर टाल देता। "हां-हां, बाद में कर लूंगा!" कहकर वह बाहर भाग जाता। दिनभर सड़कों पर घूमता, क्रिकेट खेलता, आइसक्रीम खाता।

माता-पिता बहुत दुखी हो गए। उनकी सलाहें अमित के कानों पर जूते की तरह बजती रहीं, लेकिन वह कभी न माना। आखिरकार, वे इतने निराश हो गए कि बोलना ही बंद कर दिया। घर में सन्नाटा छा गया। अमित को भी अजीब लगा, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी करतूतों का फल है।

एक दिन अमित के दोस्तों ने कहा, "चल न, पार्क में नया स्विंग आया है। पैसे लेकर चल!" अमित ने सोचा, मजा आएगा। वह घर आया और मम्मी-पापा के पास गया। "मम्मी, पापा, थोड़े पैसे दो न! बहुत जरूरी है।" लेकिन मम्मी ने मुंह फेर लिया। पापा ने अखबार पढ़ते रहे। अमित ने फिर कहा, "प्लीज, मम्मी! पापा!" कोई जवाब न मिला। अमित बार-बार चिल्लाया, हाथ जोड़े निवेदन किया। आखिरकार, आंसू बहने लगे। "आप लोग मेरी बात ही नहीं सुन रहे!"

तभी मम्मी ने धीरे से कहा, "बेटा, तुम भी तो हमारी बातें अनसुनी करते हो। हम रोज कहते थे पढ़ो, मानो, लेकिन तुमने कभी न सुनी।”

अमित को अपनी गलती का एहसास हो गया। वह शर्म से लाल हो गया। "सॉरी मम्मी-पापा! अब से मैं आपकी हर बात मानूंगा। पढ़ाई भी करूंगा।" माता-पिता ने उसे गले लगा लिया। अमित ने वादा निभाया। अब वह अच्छा छात्र बन गया और घर में खुशियां लौट आईं।

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