लोक कथाएँ
Lok Kathayen
 Hindi Kavita 

Rahasya Ki Baat: Lok-Katha (Tripura)

रहस्य की बात: त्रिपुरा की लोक-कथा

त्रिपुरा के एक गाँव में एक बूढ़ा आदमी मरणासन्न था। उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा – “देख बेटा! मैं अपनी मृत्यु से पहले तुम्हें एक सलाह देना चाहता हूँ, अगर तुम इसका पालन नहीं करोगे तो हो सकता है कि जीवन में तुम्हें बहुत दुःख झेलना पड़े।”

बेटा ने कहा – “वह क्या सलाह है बाबूजी?”
“बेटा! औरत को कभी भी कोई गोपनीय बात नहीं बताना चाहे वह तुम्हारी अपनी बीवी ही क्यों न हो, क्योंकि उनके पेट में कोई बात नहीं पचती।”
पिता की मृत्यु हो गयी और वह व्यक्ति खेती–बारी में लगा रहा और पिता के नसीहत को भी भूल गया।
उसकी पत्नी खूब बातें करती थी। जब वह कुआँ पर पानी भरने जाती तो गाँव के औरतों से खूब बातें करती थीं।

एक दिन उस आदमी ने अपनी पत्नी से कहा – सुनो हमारी कमाई अच्छी है। अब इस कच्ची झोंपड़ी की जगह एक पक्का मकान बनाना चाहता हूँ।
दूसरे दिन उसका एक मित्र रास्ते में मिला और उससे बोला – “मैं भी एक नया मकान बनाना चाहता हूँ।”
उस व्यक्ति को लगा कि मेरा मित्र यह क्यों बोल रहा है कि मैं भी एक नया मकान बनाना चाहता हूँ।
कहीं मेरी बीवी ने तो कुछ नहीं बताया।
उसने अपनी बीवी की परीक्षा लेने की सोची।

अगले दिन उसने एक आवारा कुत्ते को मारकर अपने खेत में गाड़ दिया। घर आकर पत्नी से बोला – “आज मुझसे बड़ा अपराध हो गया। मैं तुम्हें बता रहा हूँ, तुम किसी को मत बताना। आज मैंने गलती से आदमी को मार दिया और उसे अपने ही खेत में गाड़ दिया। यह बात किसी को भी मत बताना।”

शाम को उसकी पत्नी कुआँ पर पानी लाने गयी। वह अपनेआप को रोक नहीं पाई और वहां सबको बता दी। वहां पानी लेने एक पुलिस वाले की बीवी भी आती थी। उसने यह बात जाकर अपने पुलिस पति को बता दिया।
अगले दिन पुलिस आयी और उसे पकड़कर ले गयी। उसे कोर्ट में पेश किया गया।
उसने यह कहा कि मैं अपनी पत्नी की परीक्षा ले रहा था। वह कोतवाल को खेत पर ले गया और जमीन खोदकर कुत्ते की लाश निकाल कर रख दी। उसने कहा –
“मैंने गली के एक आवारा कुत्ते को मारा था जिसने कई लोगों को काट लिया था।” वह बरी हो गया।
उस दिन से वह व्यक्ति कोई भी गोपनीय बात अपनी पत्नी से नहीं बताता था।

 
 
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