Machis Bechne Wali Chhoti Si Ladki: Hans Christian Andersen

माचिस बेचने वाली छोटी सी लड़की: हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन

यह नए साल का दिन था और भयंकर सर्दी थी जैसे-जैसे शाम हो रही थी और अंधेरा हो रहा था, बर्फ तेजी से पड़ने लगी थी। गली में नंगे पैर और बिना जूतों के एक गरीब और छोटी लड़की चल रही थी। हालांकि यह सत्य है कि जब वह घर से निकली तो उसके पास चप्पलें थी। लेकिन वह चप्पलें उसके पैरों के लिए बहुत ज्यादा बड़ी थी। पहले उसकी मां उन चप्पलों को पहनती थी। एक दिन जब दो गाड़ियां गली से तेजी से गुजरी तो उस लड़की को अपने आप को बचाने के चक्कर में इधर से उधर भागी जिसके कारण एक चप्पल मिली नहीं और दूसरी चप्पल को एक लड़का लेकर भाग गया।

इसलिए वह छोटी लड़की नंगे पैर ही गली में जा रही थी उसके पैर ठंड से लाल और नीली पड़ गए थे। एक पुरानी पोशाक जो उसने पहनी हुई थी उसमें माचिस की गठरी थी। कुछ माचिस की गठरी उसने अपने हाथ में ले रखी थी। उसकी माचिसों को किसी ने नहीं खरीदा था नहीं किसी ने पूरे दिन में एक पैसा भी उसे दिया था।

वह छोटी लड़की ठंड और भूख से कांपते हुए धीरे-धीरे रेंगती हुई चली जा रही थी और अपने आपको अभागी महसूस कर रही थी। बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े उसके लंबे बालों पर गिर रहे थे जो उसकी गर्दन के पास एक सुंदर घेरा बनाए हुए थे। लेकिन उसने ऐसी ठंड में अपनी सुंदरता के बारे में नहीं सोचा। हर एक खिड़की से प्रकाश बाहर आ रहा था और वह नए साल के लिए बनाए जा रहे हैं पकवानों की सुगंध को सूँघ सकती थी। वह अपने आपको उसके बारे में सोचने से नहीं रोक सकी।

दो घरों के बीच के कोनो में वह बैठ गई और उसने अपने छोटे पैरों को अपने नीचे लगा लिया। लेकिन तब भी उसे बहुत ज्यादा ठंड लग रही थी। उसे घर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि उसने अभी तक एक भी माचिस नहीं बेची थी और एक भी पैसा उसके पास नहीं था। और उसके पिताजी निश्चित ही इस बात से खुश नहीं होते ।इसके अतिरिक्त घर पर भी सर्दी बहुत ज्यादा थी और उनके घर पर केवल एक छत थी जो छेदों से भरी हुई थी।

अब उसके छोटे-छोटे हाथ सर्दी से लगभग जम से गए थे ।उसने सोचा कि शायद एक माचिस उसकी उंगलियों को गर्म कर सकती है यदि वह उसे जलाए। इसलिए उसने एक माचिस निकाली और उसे जलाया। उसे जलाते ही गर्म और चमकदार एक छोटी मोमबत्ती की तरह लौ निकली। उसने अपने हाथ उसके ऊपर रखे। यह लौ बहुत ही सुंदर लग रही थी। और उस छोटी लड़की को लग रहा था कि वह एक बड़े आयरन स्टोव के आगे बैठी हुई है और उसमें प्यारी सी आग जल रही है । वह बहुत अच्छे से चली और उस लड़की ने अपने पैरों को गरम करने के लिए फैला लिया. वह बहुत आरामदायक महसूस कर रही थी लेकिन तभी वह आग बुझ गई स्टोव गायब हो गया कुछ नहीं बचा सिवाय उसके हाथ में जली हुई तीली के ।

दीवार के सहारे उसने दूसरी माचिस जलाई यह चमकदार जली। जब दीवार पर यह प्रकाश पड़ रहा था तब उसने अचानक से एक कमरे में देखा। एक बार की तरह सफेद कपड़ा मेज पर बिछा हुआ था जिस पर चाइना की प्लेट्स लगी हुई थी और उस पर भुनी हुई बतख जिसको पकाया गया था, उस पर रखी थी और उसमें से बहुत अच्छी सुगंध आ रही थी। और सबसे शानदार यह रहा कि वह बत्तख उस पकवान से निकल कर कूद पड़ी और छोटी लड़की की तरफ उछली और सब बत्तख के सीने में अब भी चाकू और फॉर्क लगे हुए थे । लेकिन तीली बुझ गई और कुछ नहीं बचा सिवाय दीवार के।

उसने दूसरी तीली जलाई। अब हर एक सुंदर क्रिसमस ट्री के नीचे थी, वह बहुत बड़ा था और उसको बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया था। उसने इतना सुंदर क्रिसमस का पेड़ कभी नहीं देखा था। उसने अब तक सारे क्रिसमस के पेड़ केवल दुकानदारों के यहां कांच से ही देखे थे। उस पेड़ की हरी हरी डालियों पर हजारों मोमबत्तियां जल रही थी और छोटे-छोटे पेंट की हुई आकृति जो उसने दुकान की खिड़की पर देखी थीं उस पर लगी हुई थी। जैसे ही उस लड़की ने अपने हाथ उनकी तरफ बढ़ाएं तीली बुझ गई लेकिन फिर भी क्रिसमस के पेड़ पर लगी हुई लाइट तेजी से चल रही थी और आकाश में बहुत ऊंची थी उसने एक लाइट को ऊपर से गिरते हुए देखा जो आग की एक लंबी निशानी बना रही थी। 'अब कोई मर गया है' वह बच्ची धीरे से अपनी दादी मां के लिए बोली, वह व्यक्ति जो उसे सबसे ज्यादा प्यार करता था और वह अब इस दुनिया में नहीं है। उसने कहा था कि जब भी तारे गिरते हैं तो आत्मा स्वर्ग में जाती है उसने दीवार के सहारे खड़े होकर दूसरी तीली जलाई उस तीली की चमक ने उसकी प्रिय दादी मां को उसके सामने लाकर खड़ा कर दिया।

ओह दादी मां वह बच्ची चिल्लाई मुझे अपने साथ ले लो मुझे पता है जब यह तीली बुझ जाएगी तो आप उस गरम स्टोव और शानदार नए साल के उत्सव और सुंदर क्रिसमस के पेड़ की तरह चली जाओगी। कहीं उसकी दादी मां चली न जाए इसलिए उसने सारी माचिस दीवार के सहारे खड़ी होकर जला दी।

इन माचिसों के जलाने से इतनी तेज प्रकाश हुआ जो कि दोपहर के सूरज से भी ज्यादा था। उसकी दादी मां इतनी भव्य और सुंदर कभी नहीं लगी थी जितनी आज लग रही थी।

उसने उस छोटी लड़की को अपनी बाहों में ले लिया और दोनों खुशी खुशी ऊंचे बहुत ऊंचे धरती से ऊपर सर्दी और भूख से दूर स्वर्ग की ओर उड़ चले।

अगली सुबह जब लोगों को वह मिली तो वह दीवार के सहारे झुकी हुई थी । पुराने साल की अंतिम शाम को उसके गाल लाल थे और हंसता हुआ चेहरा मौत से जम गया था। 'बेचारी गरीब लड़की वह अपने आप को गर्म करना चाहती थी' , लोगों ने कहा।

लेकिन आश्चर्य वह इतनी खुश क्यों थी लोगों ने पूछा ।लेकिन किसी ने यह कल्पना नहीं की, कि कितनी सुंदर चीजों को उसने देखा और नई साल की शाम को कितना खुश होकर वह अपनी दादी मां के साथ स्वर्ग को गई।

 
 
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