Bajun Aur Jhore: Lok-Katha (Santal/Santadi)

बाजून और झोरे संताड़ी/संताली लोक-कथा

किसी समय बाजून और झोरे नामक दो भाई थे। बाजून विवाहित था और एक दिन उसकी पत्नी बुखार के कारण बीमार हो गई। एक दिन बाजून खेत में जुताई करने के लिए जा रहा था, इसलिए बाजून ने झोरे से कहा की वह घर में ही ठहरे और दोपहर के भोजन में नापना से नाप कर तीन लोगों के लिए तीन नपना भात पका कर रखे, झोरे घर में ही ठहर गया और एक बर्तन में पानी भर के उसे उबलने के लिए रख दिया; तब वह यह देखने के लिए गया की घर में नापना कितना है। झोरे ने देखा की घर में केवल एक ही नापना है, इसलिए झोरे ने सोचा कि “मेरे भाई ने मुझे तीन लोगों के लिए नपना पकाने को कहा है, यदि मैं केवल एक आदमी के लिए पकाता हूँ तो मुझे परेशानी हो सकती है। इसलिए वह अपने पड़ोसी के घर से दो और नापना उधार ले लिया और उसे खौलते पानी के बर्तन में डाल दिया।

बाजून जब दोपहर में खेत की जुताई करके घर लौटा तो देखा की झोरे बर्तन में कुछ फेंट रहा है, तो उसने पूछा क्या भात तैयार है। झोरे ने कोई जवाब नहीं दिया, तब बाजून ने करछुल अपने हाथ में लेते हुए कहा “मुझे देखने दो की यह तैयार है या नहीं”! लेकिन जैसे ही वह करछुल को बर्तन में हिलाया तो उसने खड़खड़ाहट की आवाज सुनाई पड़ी और जब उसने झांक कर देखा तो पाया की बर्तन में भात नहीं था, केवल लकड़ी का तीन नपना तैर रहा था; उसने पीछे पलट कर झोरे को उसकी मूर्खता पर भला-बुरा कहा, तब झोरे ने कहा “तुमने ही मुझे कहा था कि तीन नपना बनाना, और मैंने वैसा ही किया है।” अब बाजून को दोबारा सब कुछ ठीक करके अपना भात पकाना पड़ा और बाजून को उस दिन बहुत देर से भोजन मिला।

अगले दिन बाजून ने झोरे से कहा “तुम खाना बनाना नहीं जानते हो; इसलिए आज मैं घर पर रहूँगा और तुम जुताई के लिए जाओ, कुल्हाड़ी अपने साथ लेते जाना। यदि जुताई करते समय हल को जड़ या अन्य कोई चीज पकड़ ले उसे कुल्हाड़ी से काट देना।” झोरे हल जोतने के लिए चला गया और जब जुताई करते समय हल कहीं अटक गया तो वह अपने कुल्हाड़ी से बैलों के पैरों पर दे मारा; बैल दर्द से कराह उठे और गिर पड़े, कुल्हाड़ी के वार से दोनों बैल लंगड़े हो गए। दोपहर में बाजून ने देखा की दोनों बैल लंगड़ाते हुए घर वापस आये हैं, तब उसने पूछा की इनके साथ क्या हुआ? झोरे बोला, “ओ” ऐसा इसलिए की तुम्हारे कहने के अनुसार हल के अटकने पर मैंने उनको कुल्हाड़ी मार के काट दिया है।

बाजून बोला “मूर्ख” मेरे कहने का मतलब यह था कि हल जोतते समय जब कोई पेड़ का जड़ हल को पकड़ ले तो कुल्हाड़ी से उसे काट डालना, बैलों के पैर को काटने को नहीं कहा था; इतने नासमझी से तुम कैसे रह पाओगे ? तुम हल भी नहीं जोत सकते; तुम को घर पर ही रह कर भात पकाना चाहिए, मैं शाम को बताऊंगा की यह कैसे किया जाता है।” उसके बाद झोरे घर पर रह कर खाना पकाया। बाजून की पत्नी अभी ठीक नहीं हुई थी, एक दिन बाजून खेत में जाने से पहले झोरे को बोला की शायद उसकी पत्नी स्नान करना चाहेगी, इसलिए उसे गर्म पानी से नहला देना। स्नान कराने के लिए झोरे ने खौलता हुए पानी ले कर अपने भाभी, जो की बीमारी के कारण अभी भी अपने बिस्तर पर लेटे हुई थी, के ऊपर पानी को डालने लगा; वह पानी से जलने लगी और चिल्लाते हुए बोली “मेरे उपर मत डालो,” लेकिन झोरे हँसता रहा और पानी उँड़ेलता रहा। गर्म पानी से जल जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। तब वह उसे कपड़े में लपेट दिया और भोजन ला कर उसे खाने के लिए देने लगा। लेकिन वह मर चुकी थी, इसलिए उसने कोई जवाब नहीं दिया, तब झोरे ने उसे वैसा ही छोड़ कर अपना भात खा लिया। जब बाजून वापस आया और देखा की उसकी पत्नी जल कर मर गई है। यह देख कर वह काफी क्रोधित हो उठा और झोरे को मारने के लिए एक कुल्हाड़ी ले कर आया; तब तक झोरे जंगल में भाग गया और बाजून भी कुल्हाड़ी लिए हुए उस के पीछे भगा।

जंगल में झोरे को एक मरा हुआ भेंड़ मिला। उसने मृत भेंड़ से पेट को निकाल लिया और आवाज दिया “भाई, तुम कहाँ हो,” मुझे कुछ मांस मिला है,” लेकिन बाजून ने उत्तर दिया, “मैं जब तक तुम्हारी जान न ले लूँ तुम को नहीं छोडूंगा।” तब झोरे भाग कर पेड़ पर चढ़ कर पेड़ के खोखला तने के अंदर छिप गया, जहाँ बाजून उसका पीछा नहीं कर सका। बाजून एक लम्बा डंडा ले कर डंडे को तने के अंदर घुसेड़ दिया और डंडा से लगातार भोंकता रहा, झोरे ने भेंड़ से निकाला हुआ पेट को पेड़ से नीचे गिरा दिया और बाजून ने समझा की उसका काम खत्म हो गया उसने अपने भाई को मार दिया है।

उसने घर जा कर अपनी पत्नी का अग्निसंस्कार किया और उसके कुछ दिन बाद अपने मृतक पत्नी एवं भाई के स्मृति में अंतिम संस्कार का रस्म पूरा करने के लिए घर के फ़र्श को गाय के गोबर से पुताई करके बकरे और मुर्ग़े की बलि चढ़ाई। अब उसी दिन झोरे घर में वापस आ कर छत के शहतीर पर चढ़ कर बैठ गया और सब कुछ देखने लगा की उसका भाई क्या कर रहा है। बाजून ने एक बड़े टोकरी में भात और जिन जानवरों की बलि दी थी उसका मांस पका कर रखा, और उसने मृतक की आत्मा को यह आवाज दी की “ओ, मेरी पत्नी, यह भात, यह भोजन, मैं तुम्हारे शुद्धिकरण के लिए दे रहा हूँ” और कहते हुए उसने जमीन पर भात के कुछ दाने छींट दिए; और उसने झोरे के लिए भी वैसे ही कहा की झोरे मेरे भाई, यह भात, यह भोजन, मैं तुम्हारे शुद्धिकरण के लिए दे रहा हूँ”, और तब झोरे ने छत पर से कहा “अच्छा तुम मुझे यह दे रहे हो तो मैं इसे ले लूँगा।”

बाजून को इस तरह के बातचीत और उत्तर की कोई उम्मीद न थी, तभी ऐसा सुन के वह हक्काबक्का हो गया और गाँव वालों से यह पूछने चला गया की, जब बलि दी जाती है तो क्या आत्मा कोई जवाब देती हैं और तब गाँव वालों ने कहा की आज तक उन्होंने कभी ऐसा नहीं सुना है। इस बीच जब बाजून यह जानने के लिए घर से बाहर गाँव में गया हुआ था, तब झोरे ने भात की टोकरी उठाई और उसे ले कर भाग खड़ा हुआ, कुछ दूर जाने के बाद वह सड़क के किनारे बैठ कर जितना खाना चाहता था उतना भात खा लिया, और तब आवाज लगाई “क्या वहां कोई सड़क पर या जंगल में है जो की भोज-भात खाना चाहता हो? एक चोरों का दल अपने चोरी के अभियान पर जा रहा था, चोरों ने यह सुना और उसके पास यह देखने गए की वह क्या कह रहा है;- उसने कहा यदि वे उस को अपने दल में शामिल कर लें तो वह उनको भात खाने के लिए देगा; वे सभी मान गए और वह उनके साथ चोरी करने के लिए चला गया।

एक धनवान आदमी के घर चोरों ने सेंध लगाई और चोरों ने जैसे ही बर्तन आदि को इकट्ठा करना शुरू किया। इस बीच अँधेरा होने के कारण झोरे गिर पड़ा, लेकिन गिरते-गिरते एक नगाड़ा उसके हाथ में आ गया और वह जोर-जोर से नगाड़ा को बजाने लगा। इस कारण घर के सभी लोग जाग गए और चोरों को भगा दिया। तब चोरों ने झोरे को गालियां देते हुए कहा की हम तुम को अपने साथ नहीं रख सकते। “बहुत अच्छा,” झोरे ने कहा, “तब मेरा खाया हुआ भात लौटा दो।” सचमुच में चोर अब ऐसा नहीं कर सकते थे। इसलिए उनको झोरे को अपने साथ रखना पड़ा। तब वे सभी एक संपन्न हिन्दू के घर गए जिसके पास घोड़ों से भरा एक अस्तबल था, चोरों ने योजना बनाई की वे घोड़ा चुरा कर उस पर बैठ कर वहां से भाग जाएँगे; सभी चोर एक-एक घोड़ा का चुनाव कर लिए परन्तु झोरे के हाथ में एक बाघ आ गया। एक बाघ, घोड़ों में से एक का शिकार करने के लिए अस्तबल के पिछवाड़े में आ घुसा था और जब सभी चोर अपने-अपने घोड़ों पर सवार हो गए, झोरे भी बाघ पर सवार हो गया और तब घबराहट में बाघ जंगल की ओर भाग निकला। झोरे चिल्लाता रहा “सड़क पर चल, तुम हिन्दू का घोड़ा, सड़क पर चल, तुम हिन्दू का घोड़ा!” लेकिन बाघ ने एक न सूनी और बाघ के द्वारा कई कांटेदार अवरोधों, झाड़ियों में घसीटने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। इस प्रकार झोरे की कहानी का अंत हो गया।

कहानी का अभिप्राय: हम सभी को बुद्धिमान की बात सुनना एवं मानना चाहिए, अनुचित साथ संकट और क्षति का कारण हो सकता है. जैसे झोरे के साथ हुआ।

(Folklore of the Santal Parganas: Cecil Heny Bompas);

(भाषांतरकार: संताल परगना की लोककथाएँ: ब्रजेश दुबे)

 
 
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